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मीडिया को भ्रामक जानकारी दे रहे हैं सिसोदिया : उपराज्यपाल

उपराज्यपाल कार्यालय को सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम देने से संबंधित कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ

Author नई दिल्ली | May 14, 2018 06:49 am
उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बार-बार और जानबूझकर, आम जनता और मीडिया को गुमराह किया जा रहा है कि उपराज्यपाल कार्यालय सीसीटीवी कैमरों की स्थापना में देरी कर रहा है जोकि सच से बहुत दूर है।

उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीसीटीवी कैमरों के संबंध में उपमुख्यमंत्री के आरोपों को गलत और भ्रामक ठहराया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पत्र के जवाब में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखे पत्र में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कहा है कि यह कहना गलत और भ्रामक है कि उपराज्यपाल कार्यालय सीसीटीवी कैमरे लगाने में देरी कर रहा है। उपराज्यपाल ने कहा है कि उनके कार्यालय को सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के काम देने से संबंधित कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को उपराज्पाल को पत्र लिखकर कहा था कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली सरकार पूरी दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगाना शुरू करने वाली थी कि उन्होंने (उपराज्यपाल ने) इसे रोक दिया। उपमुख्यमंत्री ने अपने पत्र के माध्यम से यह भी सूचित किया था कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों और विधायकों के साथ सोमवार को उपराज्यपाल से इस मुद्दे पर मुलाकात करने उनके कार्यालय पहुंचेंगे।

बिना किसी ठोस प्रगति के दो साल से बात कर रही सरकार

अनिल बैजल ने लिखा है, ‘निर्वाचित सरकार पिछले तीन साल से सीसीटीवी की स्थापना के बारे में बात कर रही है, बिना किसी ठोस प्रगति के दिल्ली पुलिस, डीएमआरसी, डीडीए, स्थानीय निकाय, बाजार संघों, आरडब्ल्यूए आदि द्वारा शहर में 2 लाख से अधिक कैमरे पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि, इनका उपयोग किसी मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) और नियामक फ्रेम-वर्क के बिना किया जा रहा है। सीसीटीवी के अनियंत्रित और अनियमित अधिकता से सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के लिए कोई प्रभावी नतीजे नहीं होते है और यह व्यक्तियों की गोपनीयता भी भंग कर सकता है। इसलिए कानून प्रवर्तन, अपराध और जांच की रोकथाम के लिए इन कैमरों को प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए, सीसीटीवी के लिए एक एसओपी / नियामक ढांचा अनिवार्य है जिसके लिए समिति की स्थापना की गई’।

उपराज्यपाल ने कहा है कि समिति की स्थापना का आदेश कहीं भी निर्देशित नहीं करता है कि निर्वाचित सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरों का काम को देने को स्थगित करेगा। अनिल बैजल ने कहा है कि मुख्यमंत्री इस बात से सहमत होंगे कि सीसीटीवी के कामकाज की निगरानी के लिए एक ढांचा लगाने की आवश्यकता है क्योंकि मुख्यमंत्री ने 10 मई को दिल्ली सरकार के स्कूल में एक लड़की की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में शिकायत की थी, जहां घटना की तिथि पर सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है।

गुमराह किया जा रहा है आम जनता को

उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बार-बार और जानबूझकर, आम जनता और मीडिया को गुमराह किया जा रहा है कि उपराज्यपाल कार्यालय सीसीटीवी कैमरों की स्थापना में देरी कर रहा है जोकि सच से बहुत दूर है। पत्र में वे आगे लिखते हैं, ‘उपराज्यपाल कार्यालय में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना का काम देने से संबंधित कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। यह पता चला है कि पीडब्ल्यूडी द्वारा सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के लिए काम देने के प्रस्ताव के मुद्दे पर कैबिनेट नोट अभी तक प्रसारित नहीं किया गया है, इसलिए मामला केवल निर्वाचित सरकार के साथ लंबित है। सीसीटीवी निविदा के लिए काम के प्रस्ताव को रोकने या रोकने के लिए इस कार्यालय द्वारा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है’।

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