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बवाना उपचुनाव: चुनाव प्रचार आखिरी दौर में, 23 को मतदान

उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों ने कमर कस ली है। आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार घर-घर जाने के अलावा गांवों में पदयात्रा कर वोट मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

Delhi, Municipal Corporation, Elections, huslte, enrollment, aap, bjp, election commmisionइस साल दिल्ली नगर निगम चुनाव होने हैं। (प्रतीकात्मक चित्र)

बवाना विधानसभा सीट पर 23 अगस्त को होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों ने कमर कस ली है। आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार घर-घर जाने के अलावा गांवों में पदयात्रा कर वोट मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता यहां पर रोजाना प्रचार और सभाएं कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री केजरीवाल भी ग्राम पंचायतों से मिलकर उन्हें दिल्ली सरकार की ओर से यहां के किसानों के लिए किए गए विकास कार्यों और आर्थिक सहयोग का ब्योरा दे रहे हैं।  इस विधानसभा सीट के लिए सभी दलों का चुनाव प्रचार चरम पर और आखिरी दौर में है। आप के उम्मीदवार रामचंद्र बवाना विधानसभा को स्मार्ट गांव बनाने का दावा करते हुए पोस्टर बांट रहे हैं। वे डोर टु डोर कैंपेन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं और गांव के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी नहीं भूल रहे हैं। वहीं आप कार्यकर्ताओं की टोलियां ‘दारू से न नोटों से, जीतेंगे वोटों से’ जैसे नारे लगाते हुए अपने उम्मीदवार का प्रचार कर रही हैं। ‘आप’ नेताओं ने प्रचार के लिए खास रणनीति तैयार की है। आप कार्यकर्ता सरकार के कामकाज और उपलब्धियों के बारे में बताने के लिए लोगों के बीच जा रहे हैं।

दूसरी ओर भाजपा यहां प्रचार के लिए ज्यादातर जाट नेताओं को उतार रही है। वैसे भी यह सीट जाट बहुल है और हरियाणा की सीमा से लगी हुई है। भाजपा के स्टार प्रचारक और प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बवाना में अपने उम्मीदवार वेद प्रकाश के साथ पहले चरण में नुक्कड़ सभाओं पर जोर दिया है। मनोज तिवारी इलाके की गलियों में घूम-घूमकर वोट मांग रहे हैं और लोग उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ में लगे रहते हैं। मनोज तिवारी जहां भी जाते हैं, वेद प्रकाश उनके साथ नजर आते हैं। ढोल-नगाड़ों के साथ लोगों से गले मिलना और लोगों के सामने हाथ जोड़ना भी प्रचार का हिस्सा बन गया है। शनिवार को भी चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में कई सभाएं हुर्इं, जिन्हें मनोज तिवारी और भाजपा नेताओं ने संबोधित किया। तिवारी प्रचार के बहाने दिल्ली सरकार की नाकामियों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। वे कहते हैं कि दिल्ली सरकार ने अंधेर मचा रखा है और ढाई साल में उसकी नाकाम सामने आ गई है। दिल्ली में न सीसीटीवी लगे और न ही डीटीसी बसों में मार्शलों की तैनाती हुई।

वहीं कांग्रेस भी इस चुनाव को काफी गंभीरता से ले रही है। कांग्रेस ने तीन बार बवाना से विधायक रहे सुरेंद्र कुमार को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। ढोल-नगाड़ों के साथ प्रचार करने निकल रहे सुरेंद्र कुमार अपनी विधायकी के कामकाज की याद जनता को दिला रहे हैं। वे भी डोर टु डोर कैंपेन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। सुरेंद्र कुमार कहते हैं कि पिछले 15 साल से विधायक रहते हुए उन्होंने जो विकास किया है उसी के आधार पर वोट मांग रहे हैं। वे लोगों से यह भी कहते हैं कि उनके हारने के बाद यहां दो विधायक बने, लेकिन कोई विकास नहीं हुआ। सुरेंद्र कुमार के चुनाव की कमान बाहरी दिल्ली में कांग्रेस के दिग्गज नेता सज्जन कुमार ने संभाली है। जैसे-जैसे उपचुनाव की तारीख नजदीक आ रही है राजनीतिक दल, जनता से जुड़ने की हरसंभव और आखिरी कोशिश कर रहे हैं।

 

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