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साल भर के कब्जे के बाद नगर निगम ने खाली कराई 200 करोड़ रुपए की जमीन

प्राधिकरण की कार्रवाई से पहले जमीन को स्थानीय ग्रामीणों की बताकर भारतीय किसान यूनियन के नेता धरने पर बैठ गए। तोड़-फोड़ से पहले पुलिस ने धरने पर बैठे किसानों को गिरफ्तार कर सेक्टर- 6 भेज दिया।

Author नोएडा | September 6, 2017 3:39 AM
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पिछले करीब एक साल से अवैध कब्जों के खिलाफ बंद पड़ी प्राधिकरण की कार्रवाई मंगलवार को फिर से एक बड़े अभियान के रूप में शुरू हुई। सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में प्राधिकरण ने गेझा गांव में 45 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे करीब 20 हजार वर्ग मीटर जमीन पर बने अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया। बताया गया है कि कब्जा मुक्त कराई गई जमीन की कीमत 200 करोड़ रुपए है। उधर, प्राधिकरण की कार्रवाई से पहले जमीन को स्थानीय ग्रामीणों की बताकर भारतीय किसान यूनियन के नेता धरने पर बैठ गए। तोड़-फोड़ से पहले पुलिस ने धरने पर बैठे किसानों को गिरफ्तार कर सेक्टर- 6 भेज दिया। इस जमीन पर कई मंजिला इमारतें बना ली गई थी। जिनमें दुकान और शोरूम तक शामिल थे। जमीन पर एक सराय (छोटे- छोटे कमरों का समूह) भी बनी थी। जिसमें 150 कमरे बने हुए थे। इन कमरों में 200 से ज्यादा लोग रह रहे थे। प्राधिकरण दस्ते ने लोगों को जगह खाली करने के लिए 1 घंटे का समय दिया।

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प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक 25 अगस्त को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के लिए कहा गया था। इस नोटिस को खंभों और दीवारों पर चस्पा किया गया था। आरोप है कि जमीन का मुआवजा किसान उठा चुके हैं। इसके बावजूद लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया। सराय को खाली कराने के लिए माइक के जरिए एक घंटे में सारा सामान बाहर निकालने की चेतावनी दी। आनन-फानन लोगों ने सड़के बीच में ही अपना सामान रख दिया। दोपहर 2 बजे कार्रवाई शुरू हुई। लोगों ने किसी तरह अपना सामान अपने परिचितों के घर रखा। दूसरी तरफ इमारतों को ध्वस्त करने से रोकने के लिए भाकियू से जुड़े किसान सुबह 8 बजे ही गांव पहुंच गए। करीब 2 घंटे तक जमीन को स्थानीय निवासियों की बताकर कार्रवाई का विरोध किया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों को सेक्टर-6 लाया। वार्ता विफल होने पर किसान प्राधिकरण गेट के बाहर धरना देते रहे। जिसके बाद किसानों ने प्रतिदिन सुबह 10 से शाम पांच बजे तक प्राधिकरण गेट पर धरना देने का फैसला किया है।

तोड़फोड़ में 8 जेसीबी मशीनों के अलावा करीब 250 पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में प्राधिकरण अधिकारी मौजूद थे। अवैध निर्माण हटाने का अभियान करीब 4 घंटे तक चला। हालांकि स्थानीय निवासियों ने जमीन को आबादी की बताकर कार्रवाई का विरोध किया। एहतियातन पुलिस ने उक्त जमीन से 100 मीटर पहले ही रास्ते को बंद कर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। वहीं, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने में करीब 1 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरके मिश्रा ने बताया कि जमीन मुक्त कराने में हुए खर्च को भू-माफियाओं से वसूला जाएगा।

 

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