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दिल्ली: मजदूर और छात्रों का शहर से पलायन, बोले – हालात हुए ठीक तो फिर लौटेंगे…

पैसों की दिक्कत के कारण दिल्ली-एनसीआर में मजदूरी करने वाले लोगों के सामने पेट पालने तक का संकट खड़ा हो गया है।

नई दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए नोट। (तस्वीर- एक्सप्रेस फोटो)साल 2014 में देश में बाहर गया 1.34 लाख करोड़ का काला धन। (तस्वीर- एक्सप्रेस फोटो)

छोटे शहरों से दिल्ली आए मजदूर नोटबंदी के कारण अब यहां ये पलायन कर रहे हैं। पैसों की दिक्कत के कारण दिल्ली-एनसीआर में मजदूरी करने वाले लोगों के सामने पेट पालने तक का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मुखर्जी नगर और लक्ष्मीनगर जैसे इलाकों में रहने वाले छात्र भी बैंक और एटीएम की भीड़ से तंग आकर घर जाना ही मुनासिब समझ रहे हैं।
घर जा रहे मजदूर व छात्रों का कहना है कि एक-दो महीने में पैसे के लेन-देन की स्थिति सामान्य होने के बाद फिर लौटेंगे। गांवों में रहने-खाने के लिए बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं होती, लेकिन यहां बिना पैसे के दो दिन भी रह पाना मुश्किल है। नई दिल्ली स्टेशन पर शाम चार बजे से संपूर्ण क्रांति की जनरल बोगी में बैठने के लिए पूरबियों की लाइन लगती है, जिसमें ज्यादातर लोग बिहार व पूर्वी बिहार के होते हैं। शनिवार को जब ट्रेन में चढ़ने के लिए करीब डेढ़ घंटे पहले से लाइन में खड़े लोगों से घर जाने के बारे में पूछा गया तो उनमें से ज्यादातर का कहना था कि दिल्ली-एनसीआर में काम ठप पड़ा है। कंपनी का मालिक भी 500 और हजार के पुराने नोट दे रहा है जो बाजार में चल नहीं रहा है, इसलिए इस समय दिल्ली में गुजर कर पाना मुश्किल है। ऐसे में घर जाना ही ठीक है।

नजफगढ़ में र्इंट भट्ठे पर काम करने वाले ड्राइवर अशोक कुमार बिहार के सहरसा जिले के हैं। उनका कहना था कि मालिक ने मुझे नकद में पांच सौ के दो पुराने नोट दिए। एक नोट को किसी तरह बैंक से बदला और कुछ दिन खाने-पीने का इंतजाम किया। इन दिनों भट्ठे पर काम भी नहीं हो रहा है, इसलिए आखिरी बचे 500 के नोट से घर का टिकट लेकर जा रहा हूं। उसका कहना था कि टिकट काउंटर पर बिना किसी समस्या के 500 के पुराने नोट से टिकट मिल गया। वहीं गुड़गांव में एक कंपनी में टेलर का काम करने वाला संजीव भी इन दिनों कंपनी में सिलाई का काम नहीं होने से शनिवार को संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से घर जा रहा था। वैशाली के रहने वाले संजीव का कहना था कि पंद्रह दिन से कंपनी का काम बंद पड़ा है। उसके खाते में दो महीने की तनख्वाह भी पड़ी है, लेकिन एटीएम पर भीड़ और सिर्फ ढाई हजार रुपए निकलने की सीमा होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। इसलिएपरिवार को लेकर घर जा रहा हूं।

नई दिल्ली स्टेशन पर लंबी कतार के बीच खड़े मुखर्जी नगर में एसएससी की कोचिंग करने वाले राघवेंद्र का कहना था कि पिछले पंद्रह दिन में कई जगह एटीम की लाइन में लगा लेकिन पैसे नहीं निकाल पाया। वह कुछ पैसे उधार लेकर अपने घर समस्तीपुर जा रहा है और अब दिसंबर में ही लौटेगा। वहीं लक्ष्मीनगर में वेबसाइट बनाने की कोचिंग कर रहे विकास का कहना था कि घर वाले खाते में पैसे नहीं डाल पा रहे हैं, इसलिए कहा कि अभी घर चले आओ, बैंकों की स्थिति सामान्य होने पर वापस जाना।

 

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