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सरकारी विज्ञापन में पीएम मोदी की आलोचना करना चाहते थे अरविंद केजरीवाल, पब्लिसिटी डिपार्टमेंट ने कहा- गलत है यह, नहीं कर सकते

दिल्ली सरकार के नए विज्ञापनों पर सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने रोक लगा दी। सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने कहा है कि वे सभी विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट की गाइलाइन का उल्लंघन कर रहे थे।

Author September 30, 2016 9:08 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार के नए विज्ञापनों पर सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने रोक लगा दी। सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने कहा है कि वे सभी विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट की गाइलाइन का उल्लंघन कर रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने बताया है कि आप सरकार अपने उन विज्ञापनों में केंद्र सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाना चाहती थी। मिली जानकारी के मुताबिक, उन विज्ञापनों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को लेकर पीएम पर निशाना साधा जाना था। केजरीवाल आरोप लगाना चाहते थे कि केंद्र सरकार का इनकम टैक्स विभाग छोटे कारोबारियों को डरा-धमका रहा है। सूचना एवं प्रचार निदेशालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि उनकी तरफ से आप सरकार को चेतावनी दी गई है कि ऐसे विज्ञापनों को ना लगाया जाए। अधिकारी ने बताया कि विज्ञापन सीधे तौर पर पीएम पर आरोप लगा रहे थे। अधिकारी ने कहा कि किसी सरकारी विज्ञापन में प्रधानमंत्री को आरोपी की तरह दिखाना ठीक नहीं होगा।

सूचना एवं प्रचार निदेशालय के मुताबिक सरकारी विज्ञापनों के लिए दो शर्तें होती हैं। पहली यह कि विपक्षी सरकार की सोच और नीति पर प्रहार नहीं किया जा सकता, दूसरी यह कि चुनाव के वक्त किसी पार्टी या व्यक्ति के फायदे के लिए इन विज्ञापनों का इस्तेमाल ना हो। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का जिक्र करते हुए विभाग ने कहा कि विज्ञापन में दिखने वाली सामग्री राजनीति से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। विभाग ने यह भी कहा कि चुनावी वादों का जिक्र भी सरकारी विज्ञापनों में नहीं किया जाना चाहिए। मिली जानाकारी के मुताबिक विभाग के पास वह विज्ञापन दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा भेजा गया था। वह दिल्ली सरकार के प्रचार विभाग के इंचार्ज भी हैं।

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गौरतलब है कि पिछले महीने ही दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की विज्ञापन गाइड लाइंस के उल्लंघन का आरोप लगा था। केंद्र सरकार की बीबी टंडन समिति ने दिल्ली सरकार को राज्य से बाहर छपे विज्ञापनों का पैसा चुकाने का आदेश दिया था। यह रकम लगभग 18 करोड़ रुपये थी।

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