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न्यायमूर्ति गोगोई होंगे देश के प्रधान न्यायाधीश

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई 28 फरवरी 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे। इसके बाद 12 फरवरी 2011 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। अप्रैल 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में लाया गया।

न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल 13 महीने का होगा और वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के अगले प्रधान न्यायाधीश के तौर पर गुरुवार को न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के नाम पर मुहर लगा दी। कानून मंत्रालय ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी। न्यायमूर्ति गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश होंगे। वे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद तीन अक्तूबर को काम संभालेंगे। न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल 13 महीने का होगा और वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे।

परंपरा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को देश का प्रधान न्यायाधीश बनाया जाता है। ऐसे में वरिष्ठता के आधार पर न्यायमूर्ति गोगोई का नाम सबसे आगे था। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने परंपरा का पालन करते हुए अपने उत्तराधिकारी के तौर पर उनका नाम आगे बढ़ाया था। प्रधान न्यायाधीश मिश्रा ने कानून और न्याय मंत्रालय को लिखे पत्र में अगले प्रधान न्यायाधीश के लिए वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई के नाम की सिफारिश की थी। न्यायमूर्ति मिश्रा दो अक्तूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन गांधी जयंती की छुट्टी के कारण एक अक्तूबर ही उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने न्यायमूर्ति मिश्रा से अगले प्रधान न्यायाधीश के लिए नाम की सिफारिश करने का आग्रह किया था। इसके साथ ही देश के अगले प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित प्रतिवेदन (एमओपी) के अनुसार, भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश की नियुक्ति होनी चाहिए, जिसे उस पद के लिए उचित माना जाए। इस प्रक्रिया के तहत निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश से सिफारिश प्राप्त होने के बाद कानून मंत्री उसे प्रधानमंत्री के समक्ष रखते हैं, जो इस मामले में राष्ट्रपति को सलाह देते हैं। इसके आधार पर राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र जारी करते हैं।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई 28 फरवरी 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे। इसके बाद 12 फरवरी 2011 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। अप्रैल 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में लाया गया। मृदुभाषी, लेकिन बेहद सख्त जज माने जाने वाले न्यायमूर्ति गोगोई असम के रहने वाले हैं। वे पूर्वोत्तर भारत से देश के पहले प्रधान न्यायाधीश होंगे। वे इस समय सुप्रीम कोर्ट में असम की एनआरसी (नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजन) अपडेट करने की प्रक्रिया की निगरानी कर कर रहे हैं। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की प्रणाली पर सवाल उठाने वाले जजों में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई भी शामिल थे। इस मसले के उठने के बाद न्यायमूर्ति गोगोई के अगले प्रधान न्यायाधीश होने को लेकर संशय के सवाल उठने लगे थे। हालांकि, तब कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह कहते हुए स्थिति स्पष्ट की थी कि अगले प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर सरकार के इरादे पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। परंपरा के तहत मौजूदा प्रधान न्यायाधीश द्वारा अगले प्रधान न्यायाधीश के लिए नाम सुझाने पर कार्यपालिका फैसला लेगी।

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