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JNU छात्रसंघ चुनाव: शुरुआती रुझानों में लेफ्ट दल 4 में से 3 पदों पर आगे, ABVP तीसरे स्‍थान पर

जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव शुक्रवार को हुए थे। इस बार पिछले दो साल में सबसे ज्‍यादा 60 प्रतिशत मतदान हुआ था।

जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी(जेएनयू) छात्रसंघ चुनावों में आइसा-एसएफआई गठबंधन में चुनाव में हिस्सा ले रही हैं। (Express Photo)

जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी(जेएनयू) छात्रसंघ चुनावों में वोटों की गिनती चल रही है। शुरुआती रुझानों के अनुसार वामपंथी गठबंधन(एसएफआई और आईसा) आगे चल रहा है। चार में से तीन पदों पर लेफ्ट गठबंधन आगे है। विपक्षी दल एबीवीपी और बाप्‍सा काफी पीछे चल रहे हैं। जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव शुक्रवार को हुए थे। इस बार पिछले दो साल में सबसे ज्‍यादा 60 प्रतिशत मतदान हुआ था। यहां लगभग 5000 वोट डाले गए थे। शुरुआती रुझानों के अनुसार अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष और महासचिव पद पर आगे चल रही है। वहीं संयुक्‍त सचिव के पद पर डीएसएफ के प्रतिम घोषाल सबसे आगे चल रहे हैं।

रुझानों के अनुसार अध्‍यक्ष पर लेफ्ट के मोहित 1245 वोट लेकर सबसे आगे हैं। एबीवीपी की जाह्नवी 320 वोट के साथ तीसरे नंबर पर है। बाप्‍सा के राहुल 780 वोट के साथ दूसरे नंबर पर है। उपाध्‍यक्ष के लिए लेफ्ट के अमल पीपी 1503 मत लेकर पहले बाप्सा के बंशीधर 323 के साथ दूसरे और एबीवीपी के रवि रंजन 265 वोट के साथ तीसरे पायदान पर हैं। महासचिव की पोस्‍ट के लिए लेफ्ट की सत्रुपा 1130 वोट के साथ बढ़त बनाए हुए हैं। एबीवीपी के विजय 410 वोट के साथ दूसरे और बाप्‍सा के पल्लिकोंडा 328 वोट के साथ तीसरे नंबर पर हैं। चुनावों के नतीजे देर रात तक आने की संभावना जताई जा रही है। जेएनयू छात्र संघ चुनाव में पिछले साल 53.3 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस साल मतदान में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी दर्ज की गई। विश्वविद्यालय परिसर में इस वर्ष सामने आए विवादों के मद्देनजर चुनाव को दिलचस्प माना जा रहा है। चुनाव में केंद्रीय पैनल के लिए 18 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं जबकि पार्षद पद के लिए 79 उम्मीदवार मैदान में हैं।

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यहां पर आइसा-एसएफआई गठबंधन,बाप्‍सा और एबीवीपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। जेएनयू छात्र संघ पर वर्षो से वामपंथी संघों का प्रभाव रहा था और पिछले वर्ष आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी को एक सीट हासिल हुई थी। 14 सालों के अंतराल के बाद वह विश्वविद्यालय में वापसी कर सकी। वर्तमान अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार का दल एआईएसएफ इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतरा।

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