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जेएनयू के मुथू खुदकुशी मामले में उकसाने का केस दर्ज

10 मार्च को कृष ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा था-अगर समानता नहीं है तो कुछ भी नहीं है।

Author नई दिल्ली | March 16, 2017 3:15 AM
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी साल 2017 में देश के टॉप 10 शिक्षण संस्थाओं में दूसरे नंबर पर रहा । (फाइल फोटो)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधार्थी मुथू कृष्णन खुदकुशी मामले में बुधवार को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम कानून से संबद्ध धाराओं 306, 3 (10) एसटी-एससी धारा के तहत मामला दर्ज किया है। अभी मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। जेएनयू सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज के एमफिल के छात्र मुथु कृष्णन (28) ने सोमवार को अपने दोस्त के यहां छत के फंखे से फांसी लगा ली थी।  इस बारे में केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बताया कि जेएनयू छात्र मुथू कृष्णन के संदिग्ध आत्महत्या के मामले में सरकार ने दिल्ली पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सदन में स्वीकार किया कि हादसे के 48 घंटे बाद भी दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया गया था। दलित शोधार्थी के शव का बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पोस्टमॉर्टम किया गया। अस्पताल ने पांच सदस्यीय बोर्ड गठित किया था और प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के निर्देश दिए थे। छात्र के पिता ने मंगलवार को कहा था कि उनका पुत्र आत्महत्या नहीं कर सकता और मामले की सीबीआइ जांच की जानी चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी मांग की थी। मुथू कृष्णन जेएनयू में एमफिल का छात्र था और वह रोहित वेमुला आत्महत्या मामले से संबंधित आंदोलन से जुड़ा था।

उधर इस मामले में बुधवार को संसद में उठे सवालों के बाद कई पेंच सामने आ गए हैं। दक्षिण जिला उपायुक्त ने दावा किया था कि मुथू कृष्णन जेएनयू में किसी छात्र संगठन से संबंधित नहीं था। पुलिस उन तीन गतिविधियों को खंगाल रही है जिसमें उसकी मौत का राज छुपा है। जेएनयू के छात्रों के खिलाफ जो दो एफआइआर दर्ज हुई हैं, उनमें भी मुथू कृष्णन का नाम नहीं है। पुलिस को इसकी भी जानकारी नहीं है कि उसने रोहिथ वेमूला के खुदकुशी के बाद आंदोलन में भाग लिया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छात्र ने दस मार्च को जो पोस्ट किए थे, उन्हें पुलिस ने रेकार्ड पर नहीं लिया है। पुलिस का कहना है कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि जेएनयू छात्र अवसाद से पीड़ित था तो किस बात से परेशान था। पुलिस अधिकारी यह बात मान रहे हैं किछात्र कृष्णन ने दस मार्च को जो पोस्ट किए थे और उसके बाद उसने 13 मार्च शाम को खुदकुशी की है, इन तीनों दिनों की उसकी गतिविधियों से ही उसकी खुदकुशी के कारणों का पता लगेगा। इन तीन दिनों में वह कहां-कहां गया, किससे मिला और किससे बात की। यह बात भी सामने आई है कि मुनिरका विहार में रहने वाले कोरियन दोस्त गोमेन किम के घर पहुंचने से पहले मुथू कृष्णन ने किसी के साथ होली खेली थी। उसके चेहरे पर शरीर पर काफी रंग लगा हुआ था। मुनिरका विहार पहुंचने पर उससे चेहरा धोने के लिए कहा गया था। पुलिस ने मंगलवार को जिस कमरे में कृष लटका हुआ पाया गया था, उसकी फॉरेंसिक जांच कराई लेकिन उसमें कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। फिलहाल कमरे को सील कर दिया गया है। उसके मोबाइल को भी कब्जे में ले लिया गया है।

10 मार्च को कृष ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा था-अगर समानता नहीं है तो कुछ भी नहीं है। एमफिल और पीएचडी एडमिशन में कोई बराबरी नहीं है। साक्षात्कार में बराबरी नहीं है। केवल समानता का ढोंग होता है। प्रशासनिक भवन में छात्रों को प्रदर्शन नहीं करने दिया जाता है। हाशिए के लोगों के लिए शिक्षा की बराबरी नहीं है। तमिलनाडु के सेलम का रहने वाला कृष जेएनयू से एमफिल कर रहा था। वह पांच माह पहले ही दिल्ली आया था। कृष रोहित वेमुला और नजीब को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल हुआ था। कृष इससे पहले हैदराबाद विश्वविद्यालय में पढ़ता था और रोहित वेमुला का अच्छा दोस्त था।पुलिस को जांच में पता चला है कि रजनी कृष तीन बहनों का इकलौता भाई था। वह काफी गरीब परिवार से था। उसके पिता जीवनाथम सुरक्षा गार्ड हैं और मां अलामेलू दिहाड़ी मजदूर हैं। घटना से एक दिन पहले रजनी ने घर पर बात की थी और कहा था कि अगले हफ्ते वह गांव आएगा, लेकिन परिजनों को क्या पता था कि अगले ही दिन उसकी मौत की खबर उन्हें मिलेगी। एक बहन रजनी से बड़ी थी। घर में बड़ी बहन की शादी की तैयारियां चल रही थीं।

 

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