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छात्र संघ चुनावों में मुद्दा बनेगा हमला!

कांस्टीट्यूशन क्लब में जेएनयू छात्र उमर खालिद पर हमले की खबर के बाद से दिल्ली की छात्र राजनीति में हलचल मच गई है। एक ओर जहां विरोधी इस हमले को राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर खालिद के पक्ष ने कहा कि जो सवाल उठाएगा वह मारा जाएगा।

Author नई दिल्ली, 13 अगस्त। | August 14, 2018 6:47 AM
उमर को उस समय देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी का मुद्दा 2016-17 के डीयू और जेएनयू छात्र संघ चुनाव में जोरशोर से उठा था।

कांस्टीट्यूशन क्लब में जेएनयू छात्र उमर खालिद पर हमले की खबर के बाद से दिल्ली की छात्र राजनीति में हलचल मच गई है। एक ओर जहां विरोधी इस हमले को राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर खालिद के पक्ष ने कहा कि जो सवाल उठाएगा वह मारा जाएगा। जिस तरह से दोनों पक्षों की ओर से हमले पर प्रतिक्रियाएं आई हैं, उससे लग रहा है कि यह मामला अब अगले महीने होने वाले जेएनयू और डीयू छात्र संघ चुनावों तक जाएगा। दोनों पक्ष इसे अपने-अपने पक्ष में भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे। छात्र राजनेता उमर खालिद का नाम पहली बार 9 फरवरी 2016 को उस समय सुर्खियों में आया था, जब जेएनयू परिसर में आतंकी अफजल गुरु की बरसी का कार्यक्रम आयोजित हुआ था और उसमें तथाकथित रूप से देश विरोधी नारे लगे थे।

उमर को उस समय देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी का मुद्दा 2016-17 के डीयू और जेएनयू छात्र संघ चुनाव में जोरशोर से उठा था। इस मुद्दे का असर भी चुनावों में दिखा। जेएनयू में 14 साल बाद 2015 में छात्र संघ में एक सीट जीतने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के खिलाफ प्रमुख विपक्षी एक होकर सामने आ गए। इस बार एबीवीपी अपना खाता भी नहीं खोल पाई। डूसू चुनाव में भी इसका असर दिखा और दो साल से लगातार छात्र संघ की चारों सीटें जीतने वाली एबीवीपी को एक सीट गंवानी पड़ी।

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साल 2017 में रामजस कॉलेज में एक बार फिर से देशविरोधी नारे लगाए जाने की घटना हुई। इसको लेकर एबीवीपी आक्रामक दिखाई दी, तो वामपंथी संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया। डीयू में एबीवीपी और वामपंथी संगठनों ने अलग-अलग तिरंगा यात्राएं निकालीं। छात्र संघ चुनाव 2017-18 में भी इसको भुनाने का प्रयास किया गया और इस बार खमियाजा एबीवीपी को उठाना पड़ा और उसे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद गंवाने पड़े। इस साल जेएनयू छात्र संघ में एबीवीपी के हाथ खाली ही रहे। अब खालिद पर हमले के बाद इसको लेकर जेएनयू और डीयू में छात्र राजनीति में हलचल होती दिख रही है। इस घटना के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया पर उमर खालिद पर हमला ट्रेंड कर रहा है और खालिद के पक्ष और विपक्ष फिर से आमने-सामने आते दिखाई दे रहे हैं। उससे साफ हो गया है कि आने वाले छात्र संघ चुनावों में इस हमले पर छात्र राजनीति में हंगामा होना तय है।

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