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आइआइटी, जेएनयू और टाटा इंस्टीट्यूट मिलकर खोजेंगे दुनिया की बड़ी समस्याओं का हल

ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी दुनिया बड़ी समस्याओं के हल के लिए वाशिंगटन विश्वविद्यालय ने दुनिया के 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ मिलकर मैक्डॉनेल एकेडमी ग्लोबल एनर्जी एंड एन्वायरमेंट पार्टनरशिप (मैगीप) कार्यक्रम की शुरुआत की है।
Author नई दिल्ली | August 13, 2017 04:30 am
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी दुनिया बड़ी समस्याओं के हल के लिए वाशिंगटन विश्वविद्यालय ने दुनिया के 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ मिलकर मैक्डॉनेल एकेडमी ग्लोबल एनर्जी एंड एन्वायरमेंट पार्टनरशिप (मैगीप) कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसमें भारत के चार संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, आइआइटी दिल्ली, आइआइटी बॉम्बे और टाटा इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल साइंसेज भी शामिल हैं।  आइआइटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर वी रामगोपाल राव ने बताया कि मैगीप में शामिल सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के इंजीनियर व वैज्ञानिक दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक साथ काम करेंगे। वर्तमान में मैगीप के माध्यम से सभी संस्थानों के इंजीनियर और वैज्ञानिक दुनिया में वायु की गुणवत्ता सुधारने के काम में लगे हैं। उन्होंने बताया कि मैगीप ने 4 करोड़ अमेरिकी डॉलर (256 करोड़ रुपए) से अधिक की धनराशि इकट्ठा की है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हर संस्थान दूसरे संस्थान से अपना अनुभव साझा करेगा। प्रोफेसर राव के मुताबिक इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से संस्थानों के प्रोफेसर जुडेंगे लेकिन पीएचडी के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा क्योंकि प्रोफेसर इन छात्रों को अपने साथ रखेंगे। इस समूह में शामिल इंजीनियर और वैज्ञानिक जून में भारत का दौरा भी कर चुके हैं।

प्रो. राव ने बताया कि वायु की गुणवत्ता को बेहतर करने का जो काम चल रहा है, उसके तहत सभी संस्थानों को शोध के लिए धनराशि मिलेगी। इन शोधों के जरिए सही मायने में इस समस्या का हल निकालने की कोशिश की जाएगी। आइआइटी दिल्ली में समूह के लोगों ने विशेष रूप से जीवाश्म र्इंधन के सही उपयोग के बारे में चर्चा की। इस चर्चा में आइआइटी बॉम्बे के प्रोफेसरों के अलावा ऊर्जा मंत्रालय, कोल इंडिया, रिलायंस इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी लिमिटेड और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के अलावा अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

भारत के चार संस्थानों के अलावा इस कार्यक्रम में तुर्की का बोगाजिकी विश्वविद्यालय, बुडापेस्ट तकनीकी व अर्थशास्त्र विश्वविद्यालय, चीन कृषि विश्वविद्यालय, थाईलैंड का चुलालोंगकोरन विश्वविद्यालय, चीन का फुदान विश्वविद्यालय, इजराइल का इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर हेजलिया, कोरिया विश्वविद्यालय, मध्य-पूर्व तकनीकी विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सिंगापुर विश्वविद्यालय, चीन का पेकिंग विश्वविद्यालय, सियोल राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, ब्राजील का कैंपनास स्टेट विश्वविद्यालय, इजराइल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, हांगकांग का चीन विश्वविद्यालय, मेलबर्न विश्वविद्यालय, आॅस्ट्रेलिया का क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, चीन का सिन्हुआ विश्वविद्यालय, घाना विश्वविद्यालय, हांगकांग विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय, टोक्यो विश्वविद्यालय, हॉलैंड का एक विश्वविद्यालय, चिली विश्वविद्यालय और दक्षिण कोरिया का योंगसेई विश्वविद्यालय शामिल है।

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