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जेएनयू: छात्रों ने कैंपस में तले पकौड़े, चार स्टूडेंट पर कार्रवाई, एक को होस्टल से निकाला

निवर्सिटी के चीफ प्रोक्टर ने खुद संज्ञान लेकर छात्र के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद उन्हें एक नोटिस भेजा गया, जिसमें बीस हजार रुपए जमा कराने को कहा गया। साथ ही छात्र से कहा गया कि 13 जुलाई तक वो अपना हॉस्टल शिफ्ट कर लें।

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) परिसर में पकौड़ा तलने पर एमफिल के एक छात्र सहित चार पर बीस-बीस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा प्रशासन ने एमफिल छात्र को दस दिन के अंदर हॉस्टल बदलने की भी सलाह दी है। इंडिया टुडे के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेजेज के छात्र मनीष कुमार मीना के साथ चार अन्य छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकौड़ा से जुड़े बयान के विरोध में विश्वविद्यालय में पकौड़े बनाए थे। ये छात्र प्रधानमंत्री के बयान से खुश नहीं थे। मामले में यूनिवर्सिटी के चीफ प्रोक्टर ने खुद संज्ञान लेकर छात्र के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद उन्हें एक नोटिस भेजा गया, जिसमें बीस हजार रुपए जमा कराने को कहा गया। साथ ही छात्र से कहा गया कि 13 जुलाई तक वो अपना हॉस्टल शिफ्ट कर लें। हालांकि प्रशासन के निर्देश ने मीना को भ्रमित कर दिया है। चूंकि 21 जुलाई से पहले उन्हें अपने पेपर्स जमा करने होंगे और उनके पास अब पैसे नहीं हैं।

मूल रूप से राजस्थान के निवासी मीना ने बताया, ‘देश के प्रधानमंत्री ने लोगों से व्यापार के लिए पकौड़ा बनाने के लिए कहा, जो एक मजाक था। उनके इस बयान से मैं नाराज था। इसलिए पकौड़े बनाकर मैंने उनके बयान का विरोध किया। जुर्माने लगाने से जेएनयू की असंतोष की संस्कृति ढह रही है।’ मीना आगे कहा कि जुर्माने से बचने के लिए वह कानूनी मदद लेने जा रहे हैं। बता दें कि यूनिवर्सिटी के आदेश में कहा गया है कि मनीष कुमार मीना पांच फरवरी को साबरमती बस स्टैंड के पास रोड ब्लॉक करने में शामिल थे।

इसके बाद एक आदेश 9 फरवरी को जारी किया गया। इसमें कहा गया कि खाना बनाने के लिए मीना ने रोड ब्लॉक कर रखा था। यूनिवर्सिटी के आदेश पर मीना ने अपना पक्ष रख कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने रोड पर पकौड़े बनाए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट रूप से इसका जिक्र नहीं किया कि दक्षिणपंथी दृष्टिकोण की वजह से मैंने पकौड़े बनाए। प्रशासन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परेशान नहीं करना चाहता है।

छात्र ने आगे कहा कि उन्हें प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है चूंकि उन्होंने किसी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है। ऐसे कदम छात्रों के लिए समस्या पैदा करने के लिए उठाए गए हैं। ताकि छात्र अपनी पढ़ाई और रिसर्च पूरी ना कर सकें। मामले में इंडिया टुडे ने यूनिवर्सिटी प्रोक्टर कौशल कुमार का पक्ष जानने की कोशिशि की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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