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जेएनयू: प्रवेश प्रक्रिया शुरू, सीटों की कटौती का भारी विरोध

छात्र संघ के मुताबिक एमफिल-पीएचडी में कुल मिलाकर 970 प्रवेश हुए थे जो इस वर्ष घटकर 200 से कम हो गए हैं।

Author नई दिल्ली | March 23, 2017 5:03 AM
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी साल 2017 में देश के टॉप 10 शिक्षण संस्थाओं में दूसरे नंबर पर रहा । (फाइल फोटो)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने हाई कोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार को अपनी प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी। जेएनयू छात्र संघ का आरोप है कि प्रवेश के लिए जारी निर्देशिका के मुताबिक पीएचडी और एमफिल की सीटों की संख्या में पिछले सालों के मुकाबले भारी कटौती की गई है। इसी मुद्दे पर छात्र संघ ने बुधवार को कक्षाओं के बहिष्कार का एलान किया था। जेएनयू ने मई 2016 में यूजीसी की ओर से जारी गजट अधिसूचना के आधार पर एमफिल-पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश प्रक्रिया बनाई है। छात्र संघ के मुताबिक एमफिल-पीएचडी में कुल मिलाकर 970 प्रवेश हुए थे जो इस वर्ष घटकर 200 से कम हो गए हैं। छात्र संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक यूजीसी अपनी अधिसूचना को वापस नहीं ले लेता है तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। बुधवार को छात्र संघ के विरोध स्वरूप प्रोस्पेक्टस को जलाया।  कई केंद्रों में सिर्फ एक ही सीट

जेएनयू के कई केंद्रो में इस बार एमफिल-पीएचडी में एक ही सीट पर प्रवेश होगा। इनमें यूरोप अध्ययन केंद्र, दक्षिण एशिया अध्ययन, पीएचडी इन विजुएल स्टडीज, पीएचडी इन थियेटर एंड परफोर्मेंशन स्टडीज और पीएचडी इन सिनेमा स्टडीज शामिल हैं। डिप्राइवेशन अंक नहीं मिलेंगे प्रवेश की अधिसूचना के मुताबिक एमफिल-पीएचडी में प्रवेश लेने वाले किसी भी उम्मीदवार को डिप्राइवेशन अंक नहीं दिए जाएंगे। ये अंक स्नातक और स्नातकोत्तर में दाखिला लेने वाले छात्रों को ही मिलेंगे। जेएनयू देश के पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों को प्रवेश में आरक्षण देता है और इसके लिए उन्हें डिप्राइवेशन अंक दिए जाते हैं जो अधिकतम 12 हो सकते हैं।

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