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तोमर डिग्री मामले में विश्वविद्यालय के 13 दोषियों से किया जाएगा जवाब तलब

दिल्ली पुलिस ने अपनी छानबीन में पाया है कि तोमर ने केवल 12वीं तक की पढ़ाई ही पूरी की है।

Author भागलपुर | October 3, 2016 6:20 AM
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ।

दिल्ली के विधायक और पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री को रद्द करने और कसूरवार कमर्चारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए छुट्टी के बावजूद विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति की बैठक हुई। जिसमें इम्तिहान बोर्ड की इस मामले में की गई अनुशंसा को मंजूर करते हुए दोषी विश्वविद्यालय के 13 कमर्चारियों और अधिकारियों से जवाबतलब करने का सर्वसम्मति से फैसला किया गया। अनुशासन समिति की अध्यक्षता भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर दुबे ने की। बैठक के कुलपति ने बताया कि तोमर मामले में विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने जिन 13 जनों को दोषी पाया है, उनसे जबावतलब किया जाएगा। जबाव के लिए 10 रोज का समय दिया है। इसके बाद अगली बैठक में उन पर कार्रवाई के बिंदु तय होंगे। उन्होनें अगली बैठक नबंबर महीने के पहले हफ्ते में होने की बात कहीं। कुलपति ने यह भी बताया कि तोमर से उनकी कानून की डिग्री रद्द करने के बाबत भी पत्र भेज कैफियत पूछी है। मगर जवाब अभी नहीं मिला है।

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इधर जानकर सूत्र बताते है कि दिल्ली पुलिस ने अपनी छानबीन में पाया है कि तोमर ने केवल 12वीं तक की पढ़ाई ही पूरी की है। बाकी सभी डिग्री जाली है। बताते हंै कि दिल्ली बार काउंसिल ने तोमर का वकालत करने का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस आशय का पत्र दिल्ली पुलिस को मिल चुका है। भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ आशुतोष प्रसाद और कॉलेज इंस्पेक्टर विलछन रविदास दिल्ली से लौटे हंै। दिल्ली पुलिस ने उन्हें विश्वविद्यालय से जब्त किए कागजात को सत्यापित करने बुलाया था। पता चला है कि दिल्ली के थाना हौजखास की पुलिस इस मामले में तोमर के खिलाफ जल्द आरोप पत्र अदालत में दायर करेगी।

यों प्रति कुलपति डॉ अवधेश कुमार राय की अध्यक्षता वाली आंतरिक जांच समिति ने जिन 13 जनों को दोषी पाया है, उनमें विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र प्रसाद सिंह, मुंगेर के विश्वनाथ सिंह इंस्टिट्यूट आॅफ लीगल स्टडीज के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरआर पोद्दार, पंजीयन शाखा में कार्यरत दिनेश श्रीवास्तव, तत्कालीन उपकुलसचिव शंभुनाथ सिंहा, पूर्व प्रशाखा प्रभारी अनिरुद्ध दास वगैरह प्रमुख हैं। कुलसचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय जल्द ही डिजिटल लॉकर का सहारा लेगी ताकि भविष्य में किसी हेराफेरी को रोका जा सके। पटना राजभवन से भी इस तरह की हिदायत मिली है।

अनुशासन समिति की बैठक में कुलपति के अलावे प्रतिकुलपति डा. अवधेश कुमार राय, प्रॉक्टर विलछन रविदास, कानून के डिन डा. एसके पांडे और कुलसचिव डा. आशुतोष प्रसाद समेत सिंडिकेट के तीन सदस्यों ने शिरकत की। सौ बात की एक बात कि आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट आए 7 महीने बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय का ढुलमुल रवैया समझ से परे है। जिन अधिकारियों और कमर्चारियों को कसूरवार ठहराया जा रहा है उनसे केवल बारबार कैफियत ही पूछी जा रही है। मसलन लीपापोती का खेल चल रहा है। कुलपति कहते है कि जबाव मिलने पर कारर्वाई के विंदू तय किए जाएंगे।

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