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GST: दिल्ली के दाम पर सीधा मुकाबला होने से उत्साहित हैं एनसीआर के व्यापारी, दवाओं और जेवरात की बढ़ेगी कीमत

1 जुलाई से लागू हुए माल एवं सेवा कर को समझने में नाकाम ज्यादातर व्यापारी अपने हिसाब से दाम वसूल रहे हैं।

Author नोएडा | Published on: July 6, 2017 2:44 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

1 जुलाई से लागू हुए माल एवं सेवा कर को समझने में नाकाम ज्यादातर व्यापारी अपने हिसाब से दाम वसूल रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद कितना कर का भार बढ़ेगा या घटेगा? इसकी जानकारी ज्यादातर छोटे या मझोले व्यापारियों को नहीं है। लिहाजा वे सामान को या तो अधिकतम बिक्री मूल्य या उससे ज्यादा कीमत पर बेच रहे हैं। जीएसटी की पेचीदगी समझ चुके विशेषज्ञ जैसा दुकानदारों को करने को कह रहे हैं, वैसा बदलाव करने को अभी दुकानदार तैयार नहीं है। इसकी मुख्य वजह यह भी है कि पहले से खरीदे हुए सामान की बिक्री की जा रही है। जिस पर वैट या उत्पाद शुल्क दिया जा चुका है। अब यदि जीएसटी लागू होने के बाद कर बढ़ भी गया है, तब भी खरीदार अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आगे खरीदे जाने वाले माल पर जीएसटी के हिसाब से कर वसूल कर बेचने को मुनासिब मान रहे हैं। अलबत्ता, जीएसटी लागू होने के बाद दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद आदि के व्यापारियों के चेहरों पर इस बात की चमक जरूर दिखाई दे रही कि अब दिल्ली से माल लाना और उसी दाम पर बेचना आसान हो गया है।

जीएसटी लागू होने के बाद भी दवाएं अभी अधिकतम बिक्री मूल्य पर बेची जा रही हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद दवाओं की कीमत में कुछ फीसद की बढ़ोतरी होगी। लेकिन दवाओं पर अलग-अलग जीएसटी की दर लागू होने से विक्रेता अभी इस पचड़े से बचना चाह रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि जीएसटी में दवाओं पर ज्यादा कर होने का भुगतान वे अपनी जेब से करने को तैयार हैं। लेकिन एमआरपी से ज्यादा कीमत पर उसे नहीं बेच सकते हैं। यही नहीं दवाई खरीदने के बाद बकायदा बिल भी दिया जा रहा है। बिल में जीएसटी समेत मूल्य को एमआरपी के बराबर दिखाया जा रहा है। गौतम बुद्ध नगर केमिस्ट असोसिएशन के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद अन्य व्यापारियों के मुकाबले दवा विक्रेता सबसे ज्यादा परेशान हैं। केमिस्ट हजारों से लाखों तरह की दवाएं और सौंदर्य उत्पाद बेचते हैं। जीएसटी लागू होने से पहले दवा पर 5 और सौंदर्य उत्पादों पर 14.2 फीसद वैट लगता था। जीएसटी लागू होने के बाद सौंदर्य उत्पादों पर 28 फीसद कर लगाया गया है। वहीं दवाओं पर 0 से 28 फीसद कर लगाया गया है। यानी यह तय है कि जीएसटी लागू होने के बाद दवाओं और सौंदर्य उत्पादों पर कर बढ़ने से खरीदारों की जेब पर भार बढ़ेगा। लेकिन जटिल प्रक्रिया के कारण ज्यादातर दुकानदार पहले से खरीदे माल की दवाएं और कॉस्मके बाद कर बढ़ेगा लेकिन अब दिल्ली, गाजियाबाद या नोएडा में दवाओं की दाम को लेकर होने वाली विसंगति पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। दिल्ली के भगीरथ पैलेस, एम्स या सफदरजंग अस्पताल के आसपास दवाओं के बड़े कारोबारियों की मनमर्जी पर अंकुश लगेगा।

जीएसटी लागू होने के बाद अन्य उत्पादों की तरह जेवरात कारोबारियों में भी भ्रम का माहौल बरकरार है। हालांकि, सोने पर जीएसटी की दर 3 फीसद तय की गई है लेकिन आभूषण खरीदने पर इसे 3.5 फीसद लगाकर बिल काटा जाएगा। जबकि पहले जेवरात पर 2 फीसद कर, 1 फीसद कर और 1 फीसद का आयकर लगता था। इस लिहाज से सीधे- सीधे 1- 1.5 फीसद कर का भार खरीदार की जेब पर पड़ने जा रहा है। लेकिन जेवरात बेचने वाले कारोबारी इसके बावजूद जीएसटी लागू होने से खासे खुश हैं। फेडरेशन आॅफ इंडस्ट्रियलिस्ट ट्रेडर्स एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन एसके जैन ने बताया कि नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली समेत समूचे एनसीआर में सोना खरीद की मंडी दिल्ली है। आभूषण कारोबारियों को पहले दिल्ली से जेवरात या सोना लाने के लिए फार्म और 1 फीसद का सीएसटी (केंद्रीय कर) लगता था। यह 1 फीसद का सीएसटी वापस नहीं मिलता था और इसे कारोबारी को झेलना पड़ता था। वहीं जीएसटी लागू होने के बाद दिल्ली से सोना लाने पर कोई अतिरिक्त कर या फार्म की जरूरत नहीं रह गई है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से आभूषण कारोबारी 3 फीसद सोने पर और बनाई (आभूषण बनाने की मजदूरी) पर 5 फीसद के हिसाब से कर का बिल खरीदार को दे रहे हैं। पुराने सोने, आभूषण आदि के पूरे स्टॉक का स्थानांतरण जीएसटी में कर लिया गया है।

यही नहीं, पुराने आभूषण खरीद पर भी यही समीकरण लागू है। हालांकि पुराने आभूषण बेचने पर बनाई शुल्क का आकलन नहीं किया जाएगा। मसलन 10 हजार रुपए मूल्य की अंगूठी खरीदने पर कारोबारी को अपनी जेब से 3 फीसद का कर देना पड़ेगा। हालांकि रिवर्स चार्ज मैकेनिजम से यह कारोबारी को इनपुट क्रेडिट में वापस मिल जाएगा। जबकि नए आभूषण की खरीद पर सोने के मूल्य पर 3 फीसद और बनाई शुल्क पर 5 फीसद कर वसूलने के बाद बेचा जाएगा।

 
’दवा – पहले 5 फीसद वैट, अब 0-28 फीसद जीएसटी ’सौंदर्य उत्पाद- पहले 14.5 फीसद वैट, अब 28 फीसद जीएसटी ’पुराने माल को एमआरपी पर बेचकर निपटाने की कोशिश में दुकानदार, बढेÞ कर के भार को खुद उठाने को तैयार ’सोना- पहले 2 फीसद (1- वैट, 1 आयकर), अब 3 फीसद ’जीएसटी के बाद आभूषण निर्माण के शुल्क पर 5 फीसद का कर ’दिल्ली से बगैर फार्म और 1 फीसद सीएसटी दिए सोना लाना हुआ आसान ’कारोबारियों ने पुराने स्टाक को जीएसटी में स्थानांतरित कर जारी किए नए बिल ’पुराने आभूषण की खरीद पर भी दुकानदार को देना होगा 3 फीसद कर

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