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काश्तकारों को व्यापार के गुर सिखाएगा जेएनयू

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) अपने स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड अंत्राप्रन्योरशिप के जरिए काश्तकारों को व्यापार करने के गुर सिखाएगा। इसके लिए जल्द ही तीन महीने, छह महीने और एक साल की अवधि के सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

Author नई दिल्ली, 30 जुलाई। | July 31, 2018 4:21 AM
प्रतीकात्मक चित्र

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) अपने स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड अंत्राप्रन्योरशिप के जरिए काश्तकारों को व्यापार करने के गुर सिखाएगा। इसके लिए जल्द ही तीन महीने, छह महीने और एक साल की अवधि के सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। जेएनयू के रेक्टर द्वितीय प्रोफेसर सतीश चंद्र गारकोटी ने बताया कि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड अंत्राप्रन्योरशिप को शुरू करने के पीछे हमारी सोच यह है कि यहां से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी नौकरी ढूंढ़ने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें। हम चाहते हैं कि हमारे यहां से पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थी अपना व्यापार शुरू करें।

इस स्कूल में भारतीय परिदृश्य के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। प्रोफेसर गारकोटी ने बताया कि जल्द ही हम इस स्कूल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले काश्तकारों के लिए तीन महीने, छह महीने और एक साल का सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि बनारस में बनारसी साड़ियों के बहुत से काश्तकार हैं। उनमें से हम कुछ ऐसे युवाओं को चुनेंगे जो अपना व्यापार आगे ले जाना चाहते हैं। इन युवाओं की जेएनयू में पढ़ाई कराई जाएगी ताकि ये वापस जाकर अपना व्यापार शुरू करें और अन्य युवाओं को नौकरी दें। रेक्टर द्वितीय के मुताबिक इन पाठ्यक्रमों की फीस बहुत कम होगी और कुछ मामलों में ये पाठ्यक्रम मुफ्त भी होंगे।

कैट के जरिए होगा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला

जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने सोमवार को ट्वीट करके बताया कि जेएनयू के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड अंत्राप्रन्योरशिप के दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में कैट 2018 के माध्यम से जुलाई 2019 सत्र के लिए दाखिले दिए जाएंगे।
इस परीक्षा का आयोजन भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) करते हैं। प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी आइआइएम कैट की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन 8 अगस्त से 19 सितंबर तक होंगे। परीक्षा 25 नवंबर को देशभर के 147 केंद्रों पर आयोजित होगी। प्रोफेसर गारकोटी ने बताया कि इस पाठ्यक्रम के लिए सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को 12 लाख रुपए फीस चुकानी होगी। वहीं, अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को 8 लाख रुपए और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को 6 लाख रुपए फीस का भुगतान करना होगा।

दो साल बाद पीएचडी भी होगी शुरू

प्रोफेसर गारकोटी ने बताया कि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड अंत्राप्रन्योरशिप से स्नातकोत्तर करने के बाद जो विद्यार्थी शोध करना चाहते हैं, उनके लिए दो साल बाद इस स्कूल में पीएचडी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।

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