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कितनी तैयार है दिल्ली

इसके तहत दिल्ली में छह महीने बाद बीएस-6 मानक वाले र्इंधन इस्तेमाल में लाए जाएंगे। अप्रैल, 2018 से दिल्ली में सिर्फ यूरो-6 यानी बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री ही संभव होगी।
Author नई दिल्ली | November 23, 2017 05:57 am
प्रतीकात्मक तस्वीर। (ANI Photo)

सुमन केशव सिंह

केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एक अहम फैसला लिया गया है। इसके तहत दिल्ली में छह महीने बाद बीएस-6 मानक वाले र्इंधन इस्तेमाल में लाए जाएंगे। अप्रैल, 2018 से दिल्ली में सिर्फ यूरो-6 यानी बीएस-6 मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री ही संभव होगी। प्रदूषण को देखते हुए यकीनन यह फैसला सराहनीय है।  इन सबके बीच सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में बीएस-6 पैमाने को लेकर ज्यादातर पेट्रोल पंप मालिकों को न तो फैसले से जुड़ी कोई और न ही कार कंपनियों के डीलरों के पास उससे जुड़े दिशानिर्देश की कोई अधिकारिक सूचना है। इधर, कार डीलरों का भी कहना है अभी तक उनके पास सरकार की ओर से कोई सूचना नहीं भेजी गई है।

होंडा कार के सहायक विक्रय प्रबंधक नकुल बंसल का कहना है कि नए पैमाने की नीति के लागू होने से यकीनन प्रदूषण में कमी आएगी। वाहनों से निकलने वाले धुएं में शामिल पाटिर्कुलेट मैटर यानी पीए 2.5 जैसे खतरनाक कणों के हवा घुलने में 80 से 90 फीसद की कमी होगी। मानक बढ़ेंगे साथ ही पेट्रोल या डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को छानने वाला फिल्टर भी उच्च गुणवत्ता वाला होगा। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सरकार पेट्रोल और डीजल के मानकों में भी सुधार करे। यह अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। वाहन विशेषज्ञों की मानें तो नए पैमानों वाले फिल्टर ऐसे होंगे जो वर्तमान गुणवत्ता वाले र्इंधन के प्रयोग होते ही चोक हो जाएंगे।

एनसीआर में भी लागू करने का आदेश
इधर, एनजीटी ने सरकार और तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि दिल्ली के बाद एक साल के भीतर पूरे एनसीआर में यूरो-6 र्इंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। लेकिन पट्रोल पंप मालिकों का मानना है कि यह इतनी आसानी से संभव नहीं होगा। दिल्ली में करीब 97 लाख छोटे बड़े वाहन पंजीकृत हैं। जो बीएस-4 पैमाने पर चल रहे हैं। कनॉट प्लेस में इंडियन आॅयल पेट्रोल पंप के मालिक पीएल अरोड़ा का कहना है कि इस पैमाने को हासिल करने के लिए तेल शोधन संयंत्रों को भी उच्चस्तरीय बनाना होगा और पेट्रोल पंपों को भी। इसमें बहुत बड़ी राशि का खर्च आएगा। फिलहाल यह इतनी आसानी से संभव नहीं कि नए पैमाने को लागू कर दिया जाए। अरोड़ा का कहना है कि तेल कंपनियां रिफाइनरी को उच्च मानक बनाने का खर्च ग्राहकों से ही वसूलेंगी।

केवल पैमाने बढ़ाने से नहीं होगा प्रदूषण पर वार
1951 से पेट्रोल पंप चला रहे पीएल अरोड़ा का कहना है कि केवल पैमाने में इजाफा कर प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई जा सकती। इसके लिए सरकार को सड़कों पर चलने वाले जुगाडू और पुराने वाहनों को हटाने के लिए भी सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही दिल्ली में पुराने वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से पेश आना होगा। उन्होंने कहा कि एनजीटी केवल पेट्रोलियम पदार्थ से चलने वाले वाहनों पर ही पहले निशाना साधता है। जबकि प्रदूषण का मुख्य कारण अतिक्रमण की वजह से सड़कों पर लगने वाला जाम और जुगाडू और पुराने वाहन हैं। अतिक्रमण हटाकर फुटपाथों का लोगों के चलने लायक बनाना ताकि राहगीर मुख्य सड़क पर न चलें। दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों को भी बहुत ज्यादा उन्नत बनाना होगा क्योंकि पट्रोल के मानक में जितना सुधार आता है वह और ज्यादा ज्वलनशील हो जाता है और उड़ने लगता है।

उनका क्या जिन्होंने अभी खरीदे वाहन?
संतोष मिश्र ने कहा कि एनजीटी और केंद्र सरकार के आदेश का समर्थन है। बेशक इस पैमाने के पालन से पर्यावरण की रक्षा होगी लेकिन दिल्ली को फौरी राहत की जरूरत है। एनसीआर में सीएनजी र्इंधन को लागू कराने में ही सालों बीत गए थे। ऐसे इस नए आदेश का फायदा फौरी तौर पर तो नजर नहीं आ रहा है। बल्कि बीएस-4 वाहन जिन लोगों ने नए लिए हैं उनके लिए जरूर परेशान हो सकते हैं।
बीएस-6 पर क्या है योजना

’2020 से सरकार यूरो 6 नॉर्म, यानी भारत चरण 6 मानक लाने की तैयारी में है।
’वाहनों पर एक खास फिल्टर लगाए जाएंगे, इनमें डीजल पाटिर्कुलेट फिल्टर होंगे
’इससे 80 से 90 फीसद पीएम 2.5 जैसे कण हवा में रोके जा सकेंगे
’इसमें सिलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होगा
’इससे नाइट्रोजन आॅक्साइड को काबू में किया जा सकेगा
’बीएस-6 मानकों के लागू होने के बाद कारों के साथ-साथ ट्रकों, बसों जैसे वाहनों में भी फिल्टर लगाने जरूरी होंगे
’मौजूदा भारत स्टेज 4 और भारत स्टेज 3 मानकों के तहत यह शर्तें लागू नहीं होतीं हैं जिससे काफी प्रदूषण होता है

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