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दिल्ली- आग से निपटने के पूरे इंतजाम नहीं

अस्पतालों में सुरक्षा के उपाय समुचित है नहीं और हैं भी तो खानापूरी के तौर पर। पर आगजनी की सूरत में अनुभव यही बताते हैं कि नुकसान से पहले बचाव के उपाय नहीं पहुंच पाए हैं।
Author नई दिल्ली | July 20, 2017 05:52 am
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रतिभा शुक्ला

देश की राजधानी के अस्पताल भी आग से सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। अव्वल तो अस्पतालों में सुरक्षा के उपाय समुचित है नहीं और हैं भी तो खानापूरी के तौर पर। पर आगजनी की सूरत में अनुभव यही बताते हैं कि नुकसान से पहले बचाव के उपाय नहीं पहुंच पाए हैं। गनीमत यही रही है कि उनमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली। सबसे बड़ी बात दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों को तो अनापत्ति प्रमाणपत्र तक नहीं मिला है। इनमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, जीबीपंत अस्पताल और बाबा साहब आबेडकर अस्पताल शामिल हैं। इनमें आग लगने पर कंपार्टमेंट को अलग करने की सुविधा, दमकल को पहुंचने की चौड़ी सड़क जैसी सहूलियतें न होना अहम कारण होते हैं।

जीटीबी का हाल बेहाल
राजधानी के दूसरे बड़े अस्पताल जीटीबी में फायर एक्जिट वार्ड 10, 11, 12, 13, 14, 20, 21, 22, 24, 26 में बंद हैं। यहां भी कहीं कक्षाएं कहीं आइसीयू और कहीं चिकित्सक या दूसरे कमर्चारियों के दफ्तर बने हुए हैं। बरामदे में दवाएं रखने का स्टोर बना हुआ है। यहां तक कि सीढ़ियों को भी दवाएं रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यहां पर आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं।

आरएमएल की सूरत भी अलग नहीं
आरएमएल में बीते दिनों आगजनी की दो बड़ी घटनाएं हुईं। इसमें कम से कम चार ओटी जलकर खाक हो गए थे। ट्रॉमा सेंटर में भी आग लग चुकी है। एक डॉक्टर ने कहा कि दिल्ली के सभी अस्पतालों में खासकर की जो पुरानी बनी इमारतें हैं, उनमें आगजनी की खतरा 100 फीसद है और आग लग जाए तो 80फीसद मृत्युदर होगी।

छियासी के पहले की इमारतों की दिक्कत
उच्चस्तरीय सूत्र बताते हैं कि 1986 के पहले की इमारतों पर आग सुरक्षा के कानून लागू नहीं होते। कई अस्पताल हैं जिनकी इमारतें इससे पहले की हैं। इसलिए उनपर कार्रवाई करने में अड़चन आती है। छियासी में जब कानून बना तब ऊंचाई 15 मीटर तय की गई थी और इसके हिसाब से आग सुरक्षा के इंतजाम किए जाने थे। जब नया कानून बना तब नौ मीटर ऊंचाई वाली इमारतों को भी शामिल किया गया और इसी आधार पर इन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र दिए जाने लगे लेकिन आग सुरक्षा की जो अनिवार्य शर्ते हैं उन्हें कई अस्पताल पूरी नहीं कर रहे हैं।

 

 

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