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दिल्ली छोड़ रहे प्रवासी मजदूरों ने कहा, सरकारों को हमारी चिंता नहीं, काम मिलना बंद

दिल्ली में पूर्णबंदी की घोषणा के बाद से ही प्रवासी खासकर दिहाड़ी मजदूरों का दिल्ली से अपने गांव लौटने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया।

Author नई दिल्‍ली | April 21, 2021 6:31 AM
Migrantलॉकडाउन के कारण काम नहीं मिलने से घर जाने को मजबूर हुए मजदूर। फाइल फोटो।

निर्भय कुमार पांडेय

दिल्ली में पूर्णबंदी की घोषणा के बाद से ही प्रवासी खासकर दिहाड़ी मजदूरों का दिल्ली से अपने गांव लौटने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया। बीते दो दिनों से आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशनों के बाहर बड़ी संख्या में मजदूर दिख रहे हैं। इसके साथ ही दिल्ली से सटे नोएडा के विभिन्न स्थानों से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए जाने वाली बसों के इंतजार में भी मजदूरों को देखा जा सकता है।

मयूर विहार फेस एक और अक्षरधाम मंदिर के पास भी बसों का इंतजार करते हुए दिहाड़ी मजदूर दिखे। इन मजदूरों ने बातचीत करने पर बताया कि उन्हें दिल्ली सरकार के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। बीते साल भी इन्हीं दिनों सरकार की ओर से कहा गया था कि कुछ दिनों के लिए पूर्णबंदी लगाई गई है। पर पूर्णबंदी कई महीने रही।

मयूर विहार फेस एक में बस का इंतजार कर रहे बिहार के मुधबनी निवासी दिहाड़ी मजदूर रमेश पासवान ने बताया कि वह पिछले साल काफी दिनों तक दिल्ली में फंसा रह गया था। जैसे-तैसे कर वह अपने गांव पहुंचा था। थोड़ी स्थिति समान्य होने के बाद वह दिसंबर महीने में दिल्ली लौटे थे।

दिहाड़ी पर भी उन्हें काम मिलने लगा था, लेकिन जब से कोरोना का प्रभाव बढ़ा उन्हें काम मिलने बंद हो गया था। कुछ दिनों से काम ही नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि उनके पास कुछ पैसे बचे थे। आगे भी उन्हें काम मिलने वाला नहीं है। यही कारण है कि वह समय पर गांव लौट जाना चाहते थे। रमेश ने बताया कि परिवार के सदस्य भी कह रहे हैं कि वाहन मिलते ही घर लौट जाएं। ट्रेन में टिकट मिल नहीं रहा है। यही कारण है कि बस से जाने का फैसला उन्होंने लिया।

एक अन्य प्रवासी मजदूर राजेंद्र कुमार ने कहा कि पूर्णबंदी भले ही एक सप्ताह के लिए है लेकिन काम कई दिनों से नहीं मिल रहा। वह एक दुकान में रिक्शा चलाने का काम करते थे। मालिक ने कहा कि ग्राहक नहीं आ रहे हैं ऐसे में सामान की ढुलाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए लोगों को वाहन मिलना भी कठिन है। अभी वक्त है इसलिए लौट रहे हैं। अभी तो उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्णबंदी की घोषणा नहीं की है। इस कारण आंदन विहार बस अड्डा के बाहर से निजी बस से गांव लौट सकते हैं। पिछले साल तो कई किमी तक पैदल चलने के बाद ट्रक चालक ने छत पर बैठा लिया था और तब गांव को लौट पाए थे।

बिहार के कटिहार निवासी सलीम खान ने कहा कि गरीबों की चिंता किसी भी सरकार को नहीं है। यदि दिल्ली में प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों को गांव लौटने से रोकना था तो उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। केवल अपील करने से मजदूर कैसे रुक सकता है। दिहाड़ी मजदूर हर दिन कमा कर खाने वाला है। यदि मजदूर को काम ही नहीं मिलेगा तो वह खाएगा क्या। इसकी चिंता सरकार को नहीं है। यही कारण है कि समय पर अधिकतर मजदूर गांव लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह कमरे पर रुके तो खर्च कैसे चलेगा। ऐसे में कोई कर्ज देने को भी तैयार नहीं है। साथ के मजदूर काम ही नहीं कर रहे हैं तो कर्ज कहां से भरेंगे।

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