ताज़ा खबर
 

देशभर में अवैध खनन की समानांतर अर्थव्यवस्था बनी सिरदर्द

कोल ब्लॉक की नीलामी की नई प्रक्रिया से सरकारी खजाने को प्रचुर राजस्व मिल रहा है। सरकार अप्रैल में 16 नए कोयला ब्लॉक की नीलामी की तैयारी कर रही है।
Author नई दिल्ली | April 12, 2017 04:42 am
प्रतीकात्मक फोटो

दीपक रस्तोगी

कोल ब्लॉक की नीलामी की नई प्रक्रिया से सरकारी खजाने को प्रचुर राजस्व मिल रहा है। सरकार अप्रैल में 16 नए कोयला ब्लॉक की नीलामी की तैयारी कर रही है। केंद्र की मौजूदा सरकार द्वारा कोयला विधेयक लाने के बाद कोयला खदानों की आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की गारंटी बढ़ी है। लेकिन कोयला खदान या यूं कहें कि खनिज इलाकों में अवैध खनन की अर्थव्यवस्था पर काबू पा सकने की गारंटी कितनी मिली है? यह यक्ष प्रश्न है। अवैध खनन की अर्थव्यवस्था पर तमाम कोशिशों के बावजूद अंकुश लगाने में नाकामी हाथ लगी है।
नीलामी की नई प्रक्रिया में सब कुछ आॅनलाइन होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कई सवाल फिर भी बने हुए हैं। रैट होल्स से उत्खनन के अलावा भी कोयला माफिया के गैर पंजीकृत वाहनों पर कैसे नजरदारी रखी जाएगी- इस बाबत अभी चुप्पी है।

एक टन कोयला निकालने पर आठ- नौ सौ रुपए। कोयला माफिया 1900 रुपए के भाव बेचता है। अधिकांश खरीददार स्पॉन्ज आयरन इकाइयां और रोलिंग मिल्स हैं, जो कोलकाता तक फैली हैं। वहीं, एक टन कोयले की अधिकृत कीमत तीन गुनी पड़ती है। जाहिर है, सस्ता माल भाता है। असर भी सभी के सामने है। कोयला कंपनियां खनन करते हुए स्टॉपिंग प्वाइंट (जहां कोयला खुदाई सुरक्षित नहीं मानी जाती) तक पहुंचकर काम रोक देती हैं। कोयला माफिया का काम यहीं से शुरू होता है। खुली खदानों के पास बनाए गए रैट होल्स में जितने भीतर तक की खुदाई होगी, उतनी ही कमाई भी। अलबत्ता, मौत का खतरा तो रहता ही है। रानीगंज के निमचा इलाके में कुछ अरसा पहले एक रैट होल से निकली आग की लपट ने शाम्डी गांव को निगल लिया था। हालांकि, कोयला माफिया का काम बदस्तूर जारी है।कोल इंडिया और स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया (रॉ मैटीरियल डिवीजन) में उच्च पदस्थ अफसरों को उम्मीद है कि केंद्र की खनन नीतियां बदलने की कवायद का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना है।और लीज लाइसेंस का बेजा इस्तेमाल रोकना है।

साइकिलों के जरिए बेचा जाता है 30 लाख टन कोयला
’कोल इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, हर साल 30
लाख टन कोयला साइकिलों पर ढोकर खनन माफिया बेच
देता है। अंदाजा लगाइए- सिर्फ झरिया कोयलांचल में
ें सरकार को कितने राजस्व की क्षति हो रही है।
’देश के आंकड़ों की बात करें तो कोयला उत्पादन करने
वाले 17 राज्यों में पिछले पांच साल के दौरान अवैध खनन
के 182,000 मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकांश मामले
बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और
महाराष्ट्र के हैं।
’कोयला ही नहीं, लोहा, अल्यूमीनियम, अभ्रक, तांबा,
मैग्नीज समेत कई अन्य कीमती खनिजों के प्राकृतिक
भंडारों में अवैध खनन माफिया का बोलबाला है।
’खनन माफिया- अफसरशाही और राजनीतिक दलों के
नेताओं की मिलीभगत में हर साल करोड़ों की रॉयल्टी
का चूना देश को लगता रहा है।
’ओड़ीशा में अवैध खनन माफिया के द्वारा सरकारी खजाने
को 1630 करोड़ रुपए का चूना लगाने की बात सीएजी
की रिपोर्ट में सामने आई है। राज्य सरकार वहां जांच करा
रही है। 125 खदानों में काम बंद करा दिया गया है।

 

 

कौन हैं कुलभूषण जाधव? जानिए क्या हैं उन पर आरोप

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.