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जानलेवा हो रहा बच्चों का बस्ता!

शोध से यह साबित हो चुका है कि बच्चे के वजन से 5 फीसद से ज्यादा भार वाले बैग को उठाने का असर शारीरिक विकास पर पड़ता है। स्कूल बैग के वजन को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय ने नियम भी तय किए थे।

Author नोएडा | Published on: August 24, 2017 4:51 AM
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली के विज्ञान विहार केंद्रीय विद्यालय के चौथी कक्षा के एक छात्र रियाज की पहली मंजिल से गिरने से मौत हुई। बताया जा रहा है कि बैग लेकर सीढ़ियों से उतरने के दौरान यह हादसा हुआ। इसी तरह 1 अगस्त को गाजियाबाद के जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले अमन गुप्ता (10) की भी सीढ़ियों से गिरने से मौत हुई थी। सेक्टर-30 स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर आरके गुप्ता ने इन हादसों के लिए बच्चों के स्कूल बैग के वजन को जिम्मेदार बताया है। उनके मुताबिक, ज्यादातर स्कूल दो या उससे ज्यादा मंजिलों वाले हैं। जहां पर लगने वाली कक्षाओं में आने-जाने के लिए विद्यार्थियों को खुद से तकरीबन आधे वजन के स्कूल बैग ढोने पड़ते हैं। सुबह की प्रार्थना से पहले स्कूल पहुंचने और छुट्टी होने पर घर जाने की जल्दबाजी में भारी वजन वाले ये बैग बच्चों के लिए आगे भी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रोफेसर गुप्ता ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री, अध्यक्ष सीबीएसई और गौतम बुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजा है। जिसमें प्रत्येक स्कूल में किताबों, पुस्तकों की संख्या सीमित करने की मांग की है। इसका उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाने को जरूरी बताया है।

उन्होंने बताया कि शोध से यह साबित हो चुका है कि बच्चे के वजन से 5 फीसद से ज्यादा भार वाले बैग को उठाने का असर शारीरिक विकास पर पड़ता है। स्कूल बैग के वजन को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय ने नियम भी तय किए थे। अलबत्ता नियमों के बावजूद जमीनी स्तर पर इन पर अमल नहीं हुआ है। 2012 में दिल्ली में छठी कक्षा का बच्चा बैग के भारी वजन की वजह से सीढ़ियों पर उतरते हुए रेलिंग से नीचे गिर गया था। तकनीकी तरक्की और डिजिटल युग के बावजूद स्कूल बैग के वजन को कम करने पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के वजन से 10 फीसद ज्यादा भार स्कूल बैग का नहीं होना चाहिए। 1993 में प्रोफेसर यशपाल कमेटी ने स्कूल बैग के वजन कम करने की सिफारिश की थी। जिसके बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने एनसीईआरटी से स्कूल सिलेबस का पुनर्रीक्षण कर वजन घटाने को कहा था। इसी आधार पर सीबीएसई ने भी अपने स्कूलों के नियम तय किए थे। चूंकि इन नियमों के अनुपालन को अनिवार्य नहीं किया गया था इसलिए ज्यादातर स्कूलों ने इन पर अमल नहीं किया।

उन्होंने बताया कि मौजूदा परिवेश में चौथी से छठी कक्षा वाले बच्चों के स्कूल बैग का वजन 12 किलोग्राम तक है। जिससे पीठ, गर्दन और कंधे के दर्द की शिकायतें कम उम्र में बच्चों को होने लगी हैं। बालरोग विशेषज्ञों के मुताबिक अत्यधिक वजन की वजह से बच्चों की मांसपेशियों पर खिचाव बेहद नुकसानदायक होता है। इससे रीढ़ की हड्डी में झुकाव तक आ सकता है। वहीं हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार कंधे और गर्दन, दोनों बेहद नाजुक अंग हैं।

 

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