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दिल्ली मेरी दिल्ली- आरोपों की जवाबदेही, मेट्रो की अक्लमंदी

कपिल मिश्र के खुलासे के बाद से तो केजरीवाल ट्विटर पर भी नहीं दिखते। उनके विरोधी कहते हैं कि कपिल ने उनकी बोलती बंद कर दी है उनके पास खुद पर लगाए गए आरोपों के जवाब तक नहीं हैं।

Author May 22, 2017 5:12 AM
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल)

आरोपों की जवाबदेही
आप सरकार के मंत्री रहे कपिल मिश्र की ओर से पार्टी प्रमुख और पार्टी के दूसरे नेताओं के खिलाफ हर रोज किए जा रहे खुलासों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बोलती बंद कर दी है। वैसे काफी समय से केजरीवाल और पार्टी के दूसरे नेता सवालों के जवाब देने के बजाए संवाददाता सम्मेलनों में एक तरफा अपनी बात रखते रहे हैं। बाद में लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए केजरीवाल और उनके साथी ट्विटर का सहारा लेने लगे, लेकिन कपिल मिश्र के खुलासे के बाद से तो केजरीवाल ट्विटर पर भी नहीं दिखते। उनके विरोधी कहते हैं कि कपिल ने उनकी बोलती बंद कर दी है उनके पास खुद पर लगाए गए आरोपों के जवाब तक नहीं हैं। दूसरी ओर केजरीवाल के समर्थक कह रहे हैं कि वे किस-किस के आरोपों का जवाब देंगे। उनकी ओर से जवाब देने का काम पार्टी ने संजय सिंह को सौंपा है जो खुद सबसे ज्यादा विवादों में रहे हैं। वहीं केजरीवाल की चुप्पी से पार्टी में हताशा फैल रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि जब केजरीवाल का ही बचाव नहीं हो पा रहा है तो पार्टी में और किसी बचाव कैसे होगा।

मेट्रो की अक्लमंदी
अब तक अमीरों के साथ-साथ गरीबों के भी सफर की साथी रही मेट्रो के किराए बीते दिनों ऐसे बढ़े जैसे आजकल गर्मी में पारा चढ़ रहा है। हालांकि मेट्रो के अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं। वैसे तो मेट्रो एअरपोर्ट लाइन पर किराया कम करने का प्रचार महीनों पहले से करते नहीं थकती, लेकिन बीते 20 दिनों से मेट्रो के सामान्य किराए में हुई असामान्य बढ़ोतरी की घोषणा स्टेशनों पर लाउडस्पीकरों से भूल कर भी नहीं की जा रही है। यात्री महंगा टिकट मिलते ही सन्न रह जाते हैं। पूछताछ पर उन्हें जवाब मिलता है कि किराया बढ़ गया है। कई दिन हो गए हैं। कहां थे आप? मरता क्या न करता की तर्ज पर लोग टिकट लेते हैं और बुझे मन से मेट्रो की स्मार्ट कार्यप्रणाली की चर्चा में लग जाते हैं। किसी ने ठीक ही कहा कि मेट्रो की कार्यप्रणाली सच में स्मार्ट है।

संबंधों पर सवाल
बागी आप नेता कपिल मिश्र ने बीते दिनों पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल से लेकर सत्येंद्र जैन व संजय सिंह पर थोक के भाव में आरोप लगाए, लेकिन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी नेता कुमार विश्वास पर कोई आरोप नहीं लगाया। कुमार विश्वास तो कपिल से पहले भी पार्टी के कामकाज पर उंगली उठा चुके हैं, इसलिए उनका बचाव करना कपिल मिश्र के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन मनीष सिसोदिया को उन्होंने क्यों बख्श दिया, यह समझ से परे है जबकि सिसोदिया ही केजरीवाल के सबसे करीबी माने जाते हैं। पूरी दिल्ली सरकार वही चला रहे हैं। केजरीवाल के बचाव में भी सबसे पहले वही आगे आए। हालांकि उन्होंने कपिल के खिलाफ बोलने में भी पूरी मर्यादा का ध्यान रखा। एक-दो बार केजरीवाल की ओर से जवाब देने के बाद वे अपने को सरकार के काम में व्यस्त दिखाने लगे। इससे पहले कपिल और सिसोदिया के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि कपिल की बगावत के बाद भी सिसोदिया से उनके संबंध क्यों खराब नहीं हुए।

आगे निकलने की होड़
भाजपा में बयान जारी करने के लिए कई नेताओं में होड़ लगी रहती है। अनुशासित होने का दावा करने वाली पार्टी इस मामले में जरा भी अनुशासन नहीं बना पाई है। एक ही मुद्दे पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, मंत्री या किसी पदाधिकारी की ओर से अलग-अलग बयान जारी किया जाता है। इसके कारण पार्टी के अधिकृत बयान का राजनीतिक वजन कम हो जाता है। बयान जारी करने की होड़ में जुटे नेताओं में सबसे नया नाम भाजपा-अकाली दल के साझा उम्मीदवार बन कर विधानसभा उपचुनाव जीतने वाले एमएस सिरसा का जुड़ा है। वे शायद कम समय में सबसे आगे निकलने की होड़ में हैं। तभी तो बिना जाने-समझे दनादन हर रोज बयान पर बयान जारी कर रहे हैं। वैसे इस चक्कर में कई बार वो विवाद में भी फंस चुके हैं, लेकिन इससे उनका नाम तो सुर्खियों में आ ही गया है।
-बेदिल

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