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दिल्ली: तंगी में एक साल की पढ़ाई छूटी, अब मिलेंगे 70 लाख सालाना

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले मोहम्मद आमिर को नॉर्थ कैरोलीना (अमेरिका) की कंपनी फ्रीसन मोटर वेर्क्स में एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 70 लाख रुपए) वार्षिक वेतन पर नौकरी मिली है।

Author August 22, 2018 6:30 AM
जामिया के इतिहास में किसी इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक को इतनी बड़ी राशि पहली बार मिली है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले मोहम्मद आमिर को नॉर्थ कैरोलीना (अमेरिका) की कंपनी फ्रीसन मोटर वेर्क्स में एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 70 लाख रुपए) वार्षिक वेतन पर नौकरी मिली है। जामिया के इतिहास में किसी इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक को इतनी बड़ी राशि पहली बार मिली है। आमिर 2015-2018 बैच के छात्र हैं। आमिर के पिता शमशाद अली विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिशियन के पद पर कार्यरत हैं। आमिर ने बताया कि उन्होंने 2014 में जामिया स्कूल से 72 फीसद अंकों के साथ बारहवीं पास की थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वे उस साल कहीं भी दाखिला नहीं ले पाए थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद 2015 में उन्होंने यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्नीक में प्रवेश लिया।

सात बहन-भाइयों में दूसरे नंबर के आमिर ने बताया कि हमारे देश में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या है और इसका निदान सिर्फ इलेक्ट्रिकल वाहन ही हैं, लेकिन चार्जिंग की सही सुविधा नहीं होने से यहां इन वाहनों का चलन नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि मेरा लक्ष्य है कि मैं चार्जिंग की सुविधाओं का विकास करूं ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिकल वाहनों को अपना सकें। आमिर का कहना है कि कुछ साल अमेरिका में काम करने के बाद वे स्वदेश लौट आएंगे और यहां इलेक्ट्रिकल वाहनों की अपनी कंपनी शुरू करना चाहेंगे। आमिर के पिता शमशाद अली को अपने बेटे की कामयाबी पर बहुत गर्व है। उन्होंने बताया कि आमिर पढ़ाई में तो ठीक हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण उनका एक साल खराब हुआ।

उन्होंने बताया कि अगले साल मैंने बैंक से ऋण लेकर बेटे का दाखिला कराया। मूल रूप से मेरठ के रहने वाले आमिर के पिता का कहना है कि यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए ही खुशी का मौका नहीं है बल्कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया और देश के लिए भी है। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे का मन है कि वह कुछ साल बाद आकर देश की सेवा करे और हम भी यही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं तो चाहता हूं कि हमारे सारे बच्चे देश के काम आएं। वर्तमान में उनका पूरा परिवार ओखला गांव में रहता है। उनके घर में ईद से पहले ही खुशियां आ गई हैं।

जामिया के ट्रेनिंग एंड प्लसमेंट अधिकारी डॉक्टर रिहान खान सूरी ने बताया कि जामिया के इतिहास में किसी इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक को इतनी बड़ी राशि पहली बार मिली है। यही नहीं, जामिया के किसी इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक को अमेरिका में भी पहली बार नौकरी मिली है। उन्होंने बताया कि आमिर बहुत ही होनहार और सक्रिय छात्र रहा है। वह इन दिनों प्री-इलेक्ट्रिक कार के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट की वजह से उद्योगों के कई बड़े लोगों ने उनकी हौसलाअफजाई भी की है। आमिर ने अपना प्रोजेक्ट जामिया की यूनिवर्सिटी पाॉलिटेक्नीक के शिक्षकों के निर्देशन में पूरा किया। डॉक्टर खान के मुुताबिक, आमिर के कारण आज पूरा विश्वविद्यालय गर्व की अनुभूति कर रहा है।

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