jamia millia islamia denied allegation of Shazia Ilmi - Jansatta
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नई दिल्ली: वक्ता से नाम हटाने के शाजिया के आरोप को जामिया ने किया खारिज

आरएसएस समर्थित मंच अवेयरनेस आॅफ नेशनल सिक्योरिटी (फैंस) ने तीन तलाक के मुद्दे पर आयोजित समारोह में बोलने के लिए आमंत्रित किया था।

Author नई दिल्ली | March 2, 2017 2:59 AM
शाजिया इल्मी आज होंगी भाजपा में शामिल।

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने बुधवार को जामिया विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि उसने तीन तलाक के विषय पर आायोजित समारोह में वक्ताओं की सूची से मेरा नाम हटाने के लिए आयोजकों पर दबाव डाला।इल्मी के मुताबिक, उन्हें आरएसएस समर्थित मंच अवेयरनेस आॅफ नेशनल सिक्योरिटी (फैंस) ने तीन तलाक के मुद्दे पर आयोजित समारोह में बोलने के लिए आमंत्रित किया था। इल्मी ने पत्रकारों से कहा कि आयोजनकर्ताओं पर काफी दबाव था। पहले उन्होंने ‘तीन तलाक’ विषय को बदलकर ‘महिला सशक्तिकरण’ किया।

इसके बाद वे वक्ताओं की सूची से मेरा नाम हटाना चाहते थे। पहले निमंत्रण कार्ड में मेरा नाम था लेकिन दूसरे कार्ड में मेरा नाम नहीं था। विश्वविद्यालय ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया है। हालांकि जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।  जामिया के प्रवक्ता ने आयोजकों पर दबाव डालने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि इस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय या किसी विभाग ने नहीं किया है। आॅडिटोरियम आयोजकों को किराए पर दी गई और ऐसे समारोह में विषयवस्तु या वक्ताओं की पसंद को लेकर विश्वविद्यालय का कुछ भी लेनादेना नहीं होता है। हमारे ऊपर लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं।

जालसाजी के आरोपी सेना के सूबेदार की जमानत निरस्त

जालसाजी और अदालत को गुमराह करने के आरोप में सेना के सिग्नल यूनिट के सूबेदार रामबीर कौशिक की जमानत खारिज हो गई है है। पुल प्रहलादपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420,468,471,506/34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है। आरोपी ने साकेत स्थित अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राज कुमारी त्रिपाठी की अदालत से जमानत मिल गई थी जिसे जस्टिस विपीन सांघी की अदालत ने निरस्त कर दिया।  चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सूबेदार रामबीर कौशिक न केवल सेना में अहम पद पर हैं बल्कि इजराइल और लेबलान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैन्य दल सेवा दे चुके हैं। अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है। इससे पहले न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा ने कौशिक की जमानत अर्जी खारिज कर तत्काल कानूनी कार्रवाई का सामना करने का निर्देश दिया था।

वादी के वकील के मुताबिक सुबेदार रामबीर कौशिक ने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर अदालत में वैसे बिल प्रस्तुत किए जो थे ही नहीं। पुलिस ने जब जांच किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मसलन दवा के दुकान के फर्जी बिल लगाकर पैसे भुनाने और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई। जह पुलिस बिल के सत्यापन के लिए दुकान के पत्ते पर पहुंची तो सन्न रह गई। वह दुकान उस चीज की थी ही नहीं जिसकी खरीद का बिल दिया गया था। आरोपी फरार हैं। बता दें कि जालसाजी करने और अदालत को गुमराह करने के गंभीर आरोपी की गिरफ्तारी न करने को लेकर अदालत सख्त हुई थी। शिकायतकर्ता की अर्जी पर अदालत ने स्थानीय थाना पुल प्रहलादपुर के संबंधित पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई और मामला दिल्ली पुलिस के अपराध साखा को सौंपने के निर्देश दे दिए। मामला हस्तांतरित हो चुका है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा इसकी तफ्तीश में जुटी है।

 

 

 

 

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