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जिगिषा हत्याकांड: मृत्युदंड पाए एक मुजरिम ने फैसले को दी चुनौती

वर्ष 2009 के जिगिषा हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए दो मुजरिमोें में से एक ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

Author नई दिल्ली | September 13, 2016 4:38 PM
वर्ष 2009 के जिगिषा हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए दो मुजरिमोें में से एक ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

वर्ष 2009 के जिगिषा हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए दो मुजरिमोें में से एक ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। मुजरिम अमित शुक्ला यह कहते हुए उच्च न्यायालय पहुंचा कि निचली अदालत ने गलत तरीके से इस मामले को दुर्लभ मामलों में दुर्लभतम मानते हुए उसे मृत्युदंड सुनाया। अमित और रवि कपूर को मृत्युदंड सुनाया गया है।
निचली अदालत ने 14 जुलाई को कपूर, शुक्ला और बलजीत मलिक को 28 वर्षीय आईटी कार्यकारी जिगिषा की हत्या समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया।

निचली अदालत ने 22 अगस्त को कपूर और शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया था और कहा था कि जिगिषा को सुनियोजित तरीके से नृशंस ढंग से मार डाला गया। तीसरे मुजरिम बलजीत मलिक को जेल में उसके अच्छे आचरण के चलते मृत्युदंड से छूट दे दी गयी। मलिक पहले ही अपनी दोषसिद्धि एवं उम्रकैद की सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दे चुका है ।

दोषसिद्धि और सजा को दरकिनार करने की मांग करते हुए शुक्ला ने अपने वकील अमित कुमार के माध्यम से कहा कि निचली अदालत ने उसके बारे में भेदभाव आधारित जेल या परीवीक्षा रिपोर्ट के आधार पर मृत्युदंड सुनाकर बड़ी गलती की। उसकी अपील पर 15 सितंबर को सुनवाई होगी। इसी बीच, दो मुजरिमों को मृत्युदंड सुनाने वाली निचली अदालत ने मृत्युदंड की पुष्टि के वास्ते मामले की फाईल दिल्ली उच्च न्यायालय को भेज दी है।

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