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नीरव-माल्या के प्रत्यर्पण के मुद्दे को ब्रिटेन ने अवैध आव्रजन समझौते से जोड़ा

ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, 2017 में इंग्लैंड से पांच हजार भारतीय लौट आए। सात सौ को वहां से निष्कासित किया गया।

Author नई दिल्ली, 12 जून। | June 13, 2018 6:36 AM
पीएनबी महाघोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी। (फोटोः फेसबुक)

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रर्त्यपण की भारत की मांग को ब्रिटेन बहुप्रतीक्षित अवैध आव्रजन समझौते से जोड़ सकता है। इस समझौते पर अंतिम रूप से दस्तखत के लिए ब्रिटेन जोर दे रहा है। हस्ताक्षर होने के बाद ब्रिटेन गैर-कानूनी रूप से वहां रह रहे लगभग 75 हजार भारतीयों को यहां प्रत्यर्पित कर सकेगा। इस आशय की जानकारी मंगलवार को गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने दी। भारत को डर है कि इस संधि पर दस्तखत होने के बाद इंग्लैंड से बड़े स्तर पर भारतीयों का निष्कासन शुरू हो जाएगा। भारत इस समझौते में नागरिकता पहचान के लिए व्यक्ति की हामी समेत कुछ नए प्रावधान जोड़ना चाहता है।

अवैध आव्रजकों को लेकर इस करार पर अंतिम दस्तखत किए जाने का मुद्दा ब्रिटेन की चरमपंथ निरोधक मामलों की मंत्री बेरोनेस विलियम्स ने सोमवार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू के साथ अपनी बातचीत के दौरान उठाया। इस बैठक में गृह मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए। एक अधिकारी के अनुसार, घंटों तक चली बातचीत के दौरान बेरोनेस ने समझौता ज्ञापन पर औपचारिक रूप से अंतिम हस्ताक्षर की जरूरत पर जोर डाला, ताकि ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के एक महीने के भीतर अवैध भारतीय आव्रजकों को देश लौटाया जा सके।

इस बैठक में भारतीय पक्ष ने नीरव मोदी, विजय माल्या समेत विभिन्न ऐसे लोगों का मुद्दा उठाया, जिनके खिलाफ भारत में मुकदमे लंबित हैं। अधिकारियों ने कहा कि हमें आशंका हो रही है कि कहीं नीरव मोदी, माल्या और अन्य की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को ब्रिटेन समझौता ज्ञापन के हस्ताक्षर के मुद्दे के साथ न जोड़ दें।’ इस बैठक में ही बेरोनेस और उनके सहकर्मियों ने नीरव मोदी के ब्रिटेन में होने की पुष्टि की। अवैध आव्रजकों के मुद्दे पर तैयार किए गए मसौदा समझौते पर रीजीजू ने 10 जनवरी को अपनी लंदन यात्रा में दस्तखत किए थे। अंतिम रूप से दस्तखत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रैल में ब्रिटेन यात्रा के दौरान किए जाने थे। लेकिन अंतिम रूप से तैयार किए गए मसौदे पर दस्तखत करने में भारत की ओर से देरी होती रही। सरकार के कुछ विभागों ने प्रस्तावित अवैध आव्रजक समझौते के कुछ बिंदुओं को लेकर आपत्ति उठाई है।

ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, 2017 में इंग्लैंड से पांच हजार भारतीय लौट आए। सात सौ को वहां से निष्कासित किया गया। इंग्लैंड में सबसे ज्यादा भारतीय अवैध आव्रजक हैं। अवैध आव्रजक संधि में भारत कुछ नए प्रावधान जोड़ना चाहता है। संदिग्ध आव्रजक की नागरिकता जानने की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर भारत उनकी हामी लेना जरूरी कराना चाहता है। हालांकि, ब्रिटेन इसका विरोध कर रहा है। भारत को डर है कि बगैर किसी पहचान के काफी संख्या में भारतीयों को इंग्लैंड से बाहर किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत सरकार कह रही है कि वह उन्हीं भारतीयों को यहां स्वीकार करेगी, जिनकी नागरिकता की पुष्टि 15 दिन में इंग्लैंड कर देगा। भारत सरकार ऐसे किसी नागरिक को स्वीकार नहीं करेगी, जिन्हें उनके नाक-नक्श के आधार पर निष्कासित कर यहां भेजा गया हो। वे पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के भी नागरिक हो सकते हैं।

नीरव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में धनशोधन के आरोपों को लेकर नीरव मोदी और उसके परिवार के लोगों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए। नीरव मोदी और उसके परिवार से जुड़ी कंपनियों पर पीएनबी से 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है।

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