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पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में रणनीति बदलेगी सेना

सेना पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान की अपनी रणनीति बदलेगी। आतंकियों के खिलाफ अभियान का तरीका बदलकर ऐसी रणनीति अख्तियार की जाएगी, जिससे मोर्चेबंदी के दौरान सैन्यकर्मियों पर न्यायेतर हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप न लग सकें।

Author नई दिल्ली, 9 सितंबर। | September 10, 2018 4:16 AM
अफस्पा से संबंधित मामलों पर अदालतों के हालिया निर्देशों के कारण अभियान में जुटी सैन्य इकाइयों द्वारा ‘अत्यधिक सतर्कता’ बरते जाने की खबरें सामने के बाद सेना ने अभियान का तरीका बदलने की कवायद शुरू की है।

सेना पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान की अपनी रणनीति बदलेगी। आतंकियों के खिलाफ अभियान का तरीका बदलकर ऐसी रणनीति अख्तियार की जाएगी, जिससे मोर्चेबंदी के दौरान सैन्यकर्मियों पर न्यायेतर हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप न लग सकें। ऐसे मामलों की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों के मद्देनजर कुछ जगहों पर सैन्य अभियानों में सुस्ती की जानकारी सैन्य मुख्यालय पहुंची है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सेना के शीर्ष अधिकारियों ने अभियानों की रणनीति में सुधार करने के लिए पिछले महीने विस्तृत विचार विमर्श किया।

अफस्पा से संबंधित मामलों पर अदालतों के हालिया निर्देशों के कारण अभियान में जुटी सैन्य इकाइयों द्वारा ‘अत्यधिक सतर्कता’ बरते जाने की खबरें सामने के बाद सेना ने अभियान का तरीका बदलने की कवायद शुरू की है। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को मणिपुर में कथित न्यायेतर हत्याओं के कई मामलों की जांच करने के आदेश दिए हैं। मणिपुर में 10 से ज्यादा बड़े उग्रवादी समूह सक्रिय हैं। मणिपुर का उदाहरण देते हुए अधिकारियों ने कहा कि अदालत के दखल के बाद वहां उग्रवादियों के खिलाफ अभियान की तीव्रता में कमी आ गई है। सैन्यकर्मी अब ऐसे मामलों में लिप्त होने को लेकर चिंता जताने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कुछ महीनों में सीबीआइ को मणिपुर में सेना, असम राइफल्स और पुलिस द्वारा कथित न्यायेतर हत्याओं और फर्जी मुठभेड़ों की विस्तृत जांच करने के निर्देश देते हुए कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

अदालत के आदेश और सीबीआइ की कार्रवाई के बाद मणिपुर में तैनात कुछ सैनिकों और अधिकारियों के बीच स्पष्ट बेचैनी है। इसलिए वे लोग उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाने में अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अफस्पा लागू है, जिसके तहत सुरक्षा बलों को अभियान चलाने में विशेष छूट मिली हुई है। यह प्रावधान भी है कि केंद्र की अनुमति के बगैर सैन्यकर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज नहीं किए जा सकते। इन राज्यों में अरसे से सैन्यकर्मियों पर ज्यादती के आरोप लग रहे हैं और अफस्पा हटाने की मांग की जा रही है। हाल में सेना के सात सौ अधिकारियों-जवानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर अफस्पा को नरम किए जाने की कवायद का विरोध किया।

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