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अमेरिका से वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदेगा भारत

अमेरिका से वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने की मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने दे दी है। ‘जरूरत की महत्ता’ के आधार पर रक्षा खरीद परिषद ने एक अरब डॉलर के इस सौदे को मंजूरी दे दी है।

Author नई दिल्ली, 31 जुलाई। | August 1, 2018 4:19 AM
प्रतीकात्मक चित्र

अमेरिका से वायु सुरक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने की मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने दे दी है। ‘जरूरत की महत्ता’ के आधार पर रक्षा खरीद परिषद ने एक अरब डॉलर के इस सौदे को मंजूरी दे दी है। यह सौदा रूस से साथ चल रही एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद वार्ता से अलग है। अमेरिकी मिसाइल प्रणाली लंबी दूरी के लिए हैं, जो कम से कम चार सौ किलोमीटर दूर ही दुश्मन के लड़ाकू विमान या मिसाइल को हवा में ही गिरा देंगे। जबकि, रूसी प्रणाली चार सौ किलोमीटर के भीतर के रेंज के लिए है। रक्षा खरीद परिषद की बैठक सोमवार देर रात तक चली। इसमें रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन, सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों व विभिन्न कमांडरों ने हिस्सा लिया।

वायुसेना और नौसेना की जरूरतों के आधार पर खास फैसले किए गए। इसमें रक्षा उत्पादन व खरीद के लिए रणनीतिक भागीदारी योजना नीति को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत पहली परियोजना नौसेना के लिए देश में ही हेलिकॉप्टर बनाया जाएगा। इसके लिए विदेशी भागीदार के तौर पर अमेरिका, रूस और इसराइल की कई कंपनियां दौड़ में हैं। इस नीति के तहत रक्षा मंत्रालय रक्षा खरीद पर खर्च के 60 फीसद कम हो जाने का दावा कर रहा है। बैठक में वायुसेना की बताई जरूरत के मुताबिक राजधानी दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों को वायु सुरक्षा प्रदान करने के लिए अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने की मंजूरी दी गई। अमेरिका के वाशिंगटन शहर पर भी यही मिसाइल प्रणाली तैनात की गई है।

अमेरिका में इस प्रणाली को नेशनल एडवांस सर्फेस टू एअर मिसाइल (एनएसैम) कहा जाता है। इस मिसाइल प्रणाली की कीमत करीब एक बिलियन डॉलर है। छह सितंबर को दिल्ली में अमेरिका के रक्षा और विदेश सचिवों के साथ होने वाली 2+2 बैठक में इस मिसाइल प्रणाली को खरीदने पर भारत की रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री अंतिम दौर की बातचीत करेंगी। यह पहली बार होगा कि नॉटो से बाहर किसी देश को यह मिसाइल प्रणाली बेची जाएगी। अभी तक अमेरिका ने स्पेन, हॉलैंड और नॉर्वे को यह मिसाइल प्रणाली दी है। रक्षा मंत्रालय की योजना है कि राजधानी दिल्ली व वाणिज्यिक राजधानी मुंबई की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाया जाए।

इस प्रणाली से अमेरिका के 9-11 जैसे हमले को रोका जा सकेगा। अभी तक राजधानी दिल्ली की हवाई सुरक्षा लड़ाकू विमानों और रूसी मिसाइलों से की जाती है। मौजूदा इंतजाम के तहत अगर कोई विमान राजधानी दिल्ली और खासतौर से वीवीआइपी जोन में घुसने की कोशिश करेगा तो वायुसेना के लड़ाकू विमान चंद मिनटों में ही उसे मार गिरा सकते हैं। लड़ाकू विमान की रेंज से बाहर निकल जाने पर वायुसेना की मिसाइलें निशाना बना सकती हैं।

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