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भारत ने ओपेक से कहा, तेल व गैस के दाम जिम्मेदारी से तय करो

भारत ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से तेल व गैस के दाम जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से तय करने को कहा है।

Author नई दिल्ली, 17 अक्तूबर। | October 18, 2018 4:57 AM
भारत और ओपेक के बीच वार्षिक संस्थागत वार्ता में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आयात देशों का दृष्टिकोण रखा। दुनिया में कुल कच्चे तेल उत्पादन में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 45 फीसद है।

भारत ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से तेल व गैस के दाम जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से तय करने को कहा है। भारत ने बुधवार को कहा कि तेल व गैस कीमतों में हालिया बढ़ोतरी बाजार की बाजार के मूल सिद्धांत से अलग हैं और इससे आयातक देशों को नुकसान हो रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। कच्चे तेल की कीमतों चार साल के उच्च स्तर पर जाने तथा रुपए में गिरावट के दोहरे प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। सरकार ने हाल में ईंधन पर करों में जो कटौती की है वह कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से खत्म हो गई है। भारत और ओपेक के बीच वार्षिक संस्थागत वार्ता में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आयात देशों का दृष्टिकोण रखा। दुनिया में कुल कच्चे तेल उत्पादन में ओपेक देशों की हिस्सेदारी 45 फीसद है।

प्रधान ने कहा, ‘ओपेक के महासचिव मोहम्मद सानुसी बारकिंदो के साथ तीसरी भारत ओपेक ऊर्जा वार्ता के दौरान मुलाकात हुई। इस बैठक में मैंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का मुद्दा रखा, जिससे भारत जैसे तेल आयात देश प्रभावित हो रहे हैं। मैंने उनसे जिम्मेदार तरीके से कीमत तय करने को कहा है जो उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हित में है।’ भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 83 फीसद आयात करता है। इनमें से 85 फीसद ओपेक देशों से आता है, वहीं 80 फीसद गैस का आयात इन देशों से किया जाता है। भारत मानता है कि कच्चे तेल की कीमत और उपलब्धता तय करने में ओपेक की महत्वपूर्ण भूमिका है। कच्चे तेल की कीमतों में जो मौजूदा उछाल का सिलसिला चल रहा है, उससे कई देशों की आर्थिक बढ़ोतरी प्रभावित हुई है। प्रधान ने कहा कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे व्यापार व्यवहार पर चिंता जताई है, जिससे ऊर्जा की उपलब्धता सीमित हो रही है।

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