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लाभ के पद वाले मामले में आप के 20 विधायकों को राहत नहीं, चुनाव आयोग ने खारिज की याचिका

चुनाव आयोग के अनुसार इस मामले में केवल 20 विधायकों पर केस चलेगा क्योंकि रजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए उनपर केस नहीं चल सकता है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

आम आदमी पार्टी को चुनाव आयोग ने एक जोरदार झटका देते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में पार्टी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने आप के 21 विधायकों के पद की नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया था और अब चुनाव आयोग द्वारा इस केस को जारी रखने के बाद पार्टी की मुसीबतें और बढ़ने वाली हैं। चुनाव आयोग द्वारा विधायकों के लाभ के पद केस की सुनवाई की जा रही है। इसे लेकर आप ने याचिका दायर की थी कि जब दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा विधायकों की नियुक्तियों को रद्द किया जा चुका है तो चुनाव आयोग द्वारा सुनवाई किया जाना ठीक नहीं है।

आरोपी विधायकों ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग से केस रद्द करने की मांग की थी। इस याचिका को ठुकराते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि आरोपी विधायकों पर इसी तरह केस चलता रहेगा। चुनाव आयोग के अनुसार इस मामले में केवल 20 विधायकों पर केस चलेगा क्योंकि रजौरी गार्डन से विधायक जरनैल सिंह पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए उनपर केस नहीं चल सकता है। बता दें कि इन आरोपी विधायकों के पास 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव का पद था। इस लाभ के पद का इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अब इन विधायकों को यह साबित करना होगा कि वे इस लाभ के पद पर नहीं थे तभी उन्हें आरोप मुक्त किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा सदस्यता (अयोग्यता का प्रावधान खत्म करने) अधिनियम, 1997 में संशोधन करके संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर निकालने का भी प्रयास किया था, लेकिन, राष्ट्रपति ने इस विधेयक को खारिज करके लौटा दिया था। इस बीच प्रशांत पटेल नाम के वकील ने राष्ट्रपति के पास इन विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका डाली। राष्ट्रपति ने ये याचिका चुनाव आयोग को भेजी और इस पर कार्रवाई करके रिपोर्ट देने को कहा। मार्च 2016 में चुनाव आयोग ने इन विधायकों को नोटिस भेज जवाब मांगा था। मई में आयोग को भेजे जवाब में विधायकों ने कहा था कि उन्हें किसी तरह की सुविधा या भत्ता नहीं दिया जाता, न ही कोई दफ्तर दिया गया है। विधायकों ने आयोग से व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की थी।

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