महिला अधिवक्ता को पीटने के मामले में पूर्व बार प्रधान पर केवल जुर्माने से कोर्ट रूम में ही झूमे वकील, बतौर सेशन जज रिटायर हुई हैं पीड़ित

शिकायतकर्ता सुजाता कोहली ने आरोप लगाया था कि अगस्त 1994 में खोसला ने उन्हें उनके बाल पकड़कर घसीटा था। इन धाराओं के तहत दो साल तक की कैद का प्रावधान है। लेकिन खोसला को केवल जु्र्माना लगाकर छोड़ दिया गया।

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प्रतीकात्मक फोटो- एक्सप्रेस)

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला को 1994 में एक महिला वकील से मारपीट के मामले में कुल 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश अदालत कक्ष में सैकड़ों वकीलों की मौजूदगी में सुनाया। फैसला सुनने के लिए जहां कुछ वकील मेज और कुर्सियों के ऊपर खड़े हो गए। इस दौरान कोर्ट रूम में ही वकील एकता जिंदाबाद और राजीव खोसला जिंदाबाद के नारे लगाकर खुशी व्यक्त की गई।

PTI के मुताबिक अदालत ने मामले में खोसला को 29 अक्टूबर को दोषी ठहराया था। खोसला को धारा 323 (चोट पहुंचाना) और 506 (धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था। शिकायतकर्ता सुजाता कोहली ने आरोप लगाया था कि अगस्त 1994 में खोसला ने उन्हें उनके बाल पकड़कर घसीटा था। इन धाराओं के तहत दो साल तक की कैद का प्रावधान है। लेकिन खोसला को केवल जु्र्माना लगाकर छोड़ दिया गया। खास बात है कि कोहली उस समय तीस हजारी अदालत में वकील थीं। बाद में, वह दिल्ली की एक अदालत में न्यायाधीश बनीं और पिछले साल वह जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुई थीं।

चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गजेंद्र सिंह नागर ने आदेश में कहा कि धारा 323 के लिए खोसला को एक महीने के भीतर राज्य और पीड़िता को दस-दस हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। धारा 506 के लिए उन्हें राज्य और पीड़िता को 20 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। आदेश सुनाए जाने से पहले, वकीलों ने नारेबाजी की और कहा कि न्यायाधीश दबाव में काम कर रहे हैं। इस दौरान पुलिसकर्मी भी सुरक्षा के लिए अदालत कक्ष के बाहर खड़े थे।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुईं कोहली ने कहा कि फैसले के बाद खोसला ने अदालत और न्यायाधीश के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि आरोपी खोसला को भीड़ के साथ अदालत में प्रवेश करने की अनुमति क्यों दी जा रही है? वह यहां सैकड़ों वकीलों के साथ हैं। दोषी बार-बार यह दर्शाता है कि उसके मन में कानून के शासन का कोई सम्मान नहीं है। वह अदालत को गाली देना पसंद करता है।

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