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देश: मातृ मृत्यु दर में सुधार, असम और यूपी पीछे

गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने 2014-16 की मातृ मृत्यु दर रिपोर्ट जारी कर दी है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) सर्वेक्षण की यह रिपोर्ट राहत देने वाली है क्योंकि 2011-13 की तुलना में इस बार मृत्यु दर में 32 अंकों की गिरावट आई है।

Author नई दिल्ली। | June 13, 2018 5:34 AM
एसआरएस रिपोर्ट में तीन समूहों के तहत ईएजी प्रदेशों में असम, बिहार-झारखंड, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को शामिल किया गया है।

गजेंद्र सिंह

राष्ट्रीय स्तर पर 2011-13 की रिपोर्ट में जहां मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 167 दर्ज की गई थी, वहीं 2014-16 में यह आंकड़ा घटकर 130 पर आ गया है। रिपोर्ट की क्षेत्रीय स्तर पर तुलना करने के लिए इसे तीन समूहों में बांटा गया। पहला एंपावर्ड एक्शन गु्रप (ईएजी), दूसरा दक्षिण राज्य और तीसरे समूह में अन्य राज्यों को शामिल किया गया था। तीनों समूहों में मृत्यु दर के आंकड़ों में गिरावट आई है। ईएजी समूह में भी सुधार हुआ है, लेकिन असम, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की स्थिति अभी भी अच्छी नहीं है।

एसआरएस रिपोर्ट में तीन समूहों के तहत ईएजी प्रदेशों में असम, बिहार-झारखंड, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को शामिल किया गया है। वहीं दक्षिणी राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। अन्य राज्यों में गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों को रखा गया है। ईएजी राज्यों में 2011-13 की रिपोर्ट के तहत मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 246 थी, जो 2014-16 में घटकर 188 हो गई है।

दक्षिणी राज्यों में यह आंकड़ा 2011-13 की रिपोर्ट में 93 था जो अब 77 पर आ गया है। अन्य राज्यों में स्थिति काफी सुधरी है। यहां आंकड़ा 115 से घटकर 93 पर पहुंच गया है। मातृ मृत्यु दर के ये आंकड़े 15 से 49 साल की उम्र की महिलाओं के बीच के हैं।
पीसी पीएनडीटी कानून के तहत राष्ट्रीय निरीक्षण व निगरानी समिति की सदस्य और स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ नीलम सिंह कहती हैं कि असम में स्थिति जरूर बदहाल है, लेकिन उत्तर प्रदेश में हालात सुधरे हैं। यूपी में 2011-13 की रिपोर्ट के अनुसार प्रति एक लाख पर 285 मातृ मृत्यु दर दर्ज की गई थी जो गिरकर 201 पर आ गई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति एक लाख पर 130 महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हो रही है।

इसमें सुधार हुआ है और यह सुधार एशिया में सबसे अधिक भारत में हुआ है। डॉक्टर नीलम बताती हैं कि अभी जो मौत का आंकड़ा दिखाई दे रहा है, उसमें एक बड़ा कारण असुरक्षित गर्भपात और खून की कमी के कारण हो रही मौतों की वजह से है। अब इन दोनों मामलों पर काम करना जरूरी है। मृत्यु दर में सुधार की एक बड़ी वजह डॉक्टर नीलम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को मानती हैं जिसके तहत गर्भवती को अस्पताल लाने से लेकर प्रसव होने और उसके बाद तक सभी सुविधाएं मुफ्त में दी जाती हैं।

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