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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्‍पणी: अवैध शादी से पैदा होने वाला बच्‍चा वैध

जस्टिस डीवीई चंद्रचूड और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि अगर कानून बच्चे को वैध मानता है तो इसकी इजाजत नहीं कि ऐसे बच्चे को हमदर्दी के आधार पर नौकरी से वंचित किया जाए।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दूसरी शादी (जो की अमान्य है) से जो बच्चा पैदा हुआ है उसे हमदर्दी यानी अनुकंपा के आधार पर नौकरी से देने से मना नहीं किया जा सकता है। जस्टिस डीवीई चंद्रचूड और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि अगर कानून बच्चे को वैध मानता है तो इसकी इजाजत नहीं कि ऐसे बच्चे को हमदर्दी के आधार पर नौकरी से वंचित किया जाए। यहां जानना चाहिए कि हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक पहली शादी होते हुए किसी शख्स के लिए दूसरी शादी करना अवैध है।

दरअसल केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें केंद्र सरकार ने दीपक कुमार (बदला हुआ नाम) को प्रतिवादी बनाया। एनबीटी अखबार में छपी खबर के मुताबिक दीपक कुमार के पिता रेलवे में नौकरी करते थे। दीपक अपने पिता की दूसरी पत्नी से पैदा हुआ। पिता की मौत के बाद उसने हमदर्दी के आधार पर नौकरी मांगी मगर रेलवे ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। बाद में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ड्रिब्यूनल ने दीपक के पक्ष में आदेश दिया। इसपर मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा-16 का हवाला देते हुए कहा कि पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी अमान्य है, लेकिन दूसरी पत्नी से जो बच्चा पैदा हुआ वो वैध है। कोर्ट ने कहा कि रेलवे अनुकंपा नौकरी के आवेदन पर निचार करे। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 16 (1) ऐसे बच्चे को ही प्रोटेक्ट करने के लिए है। इसकी धारा-11 के तहत दूसरी शादी अवैध तो है लेकिन ऐसी शादी से पैदा हुआ बच्चा वैध होगा। ऐसी कोई भी शर्त संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट अगर बच्चे को वैध मानता है तो हमदर्दी के आधार पर ऐसे बच्चे को नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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