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सामाजिक इंजीनियरिंग: मासिक धर्म संबंधी मिथकों को तोड़ने के लिए आइआइटी छात्रों ने बनाए मनोरंजक खेल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के विद्यार्थियों ने युवतियों और महिलाओं के लिए कई खेल बनाए हैं जिससे कि मासिक धर्म संबंधी मिथकों और वर्जनाओं के बारे में मनोरंजक और आकर्षक तरीके से जागरूकता फैलाई जा सके।

Author नई दिल्ली, 27 जून। | June 28, 2018 6:15 AM
बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा इशिता गुप्ता के मुताबिक मौखिक सत्र और फिर इन खेलों को खेलने के बाद इनका असर जानने के लिए हमने एक सर्वेक्षण किया जिसमें हमने महिलाओं से मासिक धर्म के संबंध में एक प्रश्नावली भरने को कहा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के विद्यार्थियों ने युवतियों और महिलाओं के लिए कई खेल बनाए हैं जिससे कि मासिक धर्म संबंधी मिथकों और वर्जनाओं के बारे में मनोरंजक और आकर्षक तरीके से जागरूकता फैलाई जा सके। इनमें पहेली, रूलेट और मासिक धर्म संबंधी मूल चीजों पर ध्यान देने वाले खेल शामिल हैं। इनमें बताया जाता है कि सैनेटरी नैपकिन कब-कब बदला जाना चाहिए और उसे कैसे निपटाया जाना चाहिए। आइआइटी में प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही रितिका के मुताबिक हमने मौखिक जागरूकता सत्रों की जगह इन तीन खेलों को बनाने का निर्णय किया, जब हमने पाया कि महिलाओं में मासिक धर्म के बारे में जागरूकता की बहुत कमी है।

बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा इशिता गुप्ता के मुताबिक मौखिक सत्र और फिर इन खेलों को खेलने के बाद इनका असर जानने के लिए हमने एक सर्वेक्षण किया जिसमें हमने महिलाओं से मासिक धर्म के संबंध में एक प्रश्नावली भरने को कहा। मौखिक सत्र के बाद, 10 में से औसतन छह सवालों के उत्तर सही दिए गए, जबकि मॉड्यूल आधारित सर्वेक्षण में महिलाओं ने 8.6 फीसद जवालों के सही जवाब दिए। उनके मुताबिक हम महिलाओं को अपने सामने खेल खिलाते हैं और खेलने में उनकी मदद करते हैं। अगर वे गलतियां करती हैं तो हम उन्हें सही कराते हैं जिससे कि उनके दिमाग में कोई गलत अवधारणा बाकी न रहना पक्का हो सके।

आइआइटी की छात्रा तन्वी के मुताबिक मुझे एक जागरूकता कार्यक्रम में एक लड़की से हुई बातचीत याद है जिसमें उसने बताया कि उसके लिए उसके परिवार में महिलाओं को कपड़े के टुकड़े की जगह सैनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल के लिए समझाना कितना मुश्किल था। सिविल इंजीनियरिंग की 19 वर्षीय छात्रा ने कहा कि इसलिए यह परियोजना केवल स्कूली लड़कियों के लिए नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी है ताकि इसका पूरा फायदा सुनिश्चित किया जा सके। ‘प्रोजेक्ट तितली’ नाम की इस पहल के तहत अब तक 1,500 से अधिक महिलाओं को जागरुक किया जा चुका है।

 

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