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परीक्षा में जाति संबंधी सवाल पर एचएसएससी ने मांगी माफी

उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा व नूरपुर विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी इस बार भी उपचुनाव नहीं लड़ने की अपनी रणनीति पर कायम है।

Author May 6, 2018 2:56 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

अजय पांडेय
जूनियर इंजीनियर (सिविल) की परीक्षा में पूछे गए एक जाति संबंधी सवाल को लेकर उठे विवाद के बाद हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने माफी मांग ली है। कमीशन के परीक्षा नियंत्रक ने शनिवार को एक माफीनामे का नोटिस जारी कर कहा कि कमीशन में किसी ने भी संबंधित प्रश्नपत्र को नहीं देखा था। पहली बार जब परीक्षा हॉल में परीक्षार्थियों के समक्ष यह प्रश्नपत्र आया, तो उन्होंने ही इसे देखा। उन्होंने कहा कि मामले को मुख्य परीक्षक की जानकारी में लाया गया और उन्होंने खेद जताया है। इसके बावजूद उनके खिलाफ समुचित कार्रवाई की जा रही है। इस सवाल से यदि किसी की भावना को ठेस पहुंची है तो आयोग माफी मांगता है और खेद प्रकट करता है। दरअसल बीते, 10 अप्रैल को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के जूनियर इंजीनियर (सिविल) पद के लिए एचएसएससी ने लिखित परीक्षा का आयोजन किया।

इस परीक्षा के लिए दिए गए प्रश्नपत्र में बहुविकल्प वाले प्रश्न संख्या 75 में पूछा गया कि हरियाणा में क्या अपशकुन नहीं माना जाता है? इसके चार विकल्पों में एक विकल्प यह भी था- ब्राह्मण कन्या को देखना। अन्य विकल्पों में थे- खाली घड़ा, तेल से भरा सिंगारदान और काले ब्राह्मण से मिलना। इस सवाल का सही जवाब ब्राह्मण कन्या को देखना बताया गया था। ब्राह्मणों को लेकर इस प्रकार के सवाल पूछे जाने पर परीक्षा के आयोजन के साथ ही सियासी बवाल शुरू हो गया। ब्राह्मण समाज के नेताओं ने भी सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया। जींद के पुलिस अधीक्षक को भेजे एक पत्र में जींद के ही निवासी नीरज वत्स ने इस प्रश्नपत्र का हवाला देकर ब्राह्मण समाज की ओर से हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन के अध्यक्ष भारत भूषण भारती व इस सवाल को तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने पूछा कि एक ओर प्रश्नपत्र में कहा जा रहा है कि ब्राह्मण कन्या को देखना हरियाणा में अपशकुन नहीं माना जाता और दूसरी ओर कहा जा रहा है कि काले ब्राह्मण को देखना अपशकुन माना जाता है। यह हरियाणा में भाईचारे को बिगाड़ने का प्रयास है।

हरियाणा में इस मुद्दे पर हंगामा खड़ा हो गया है। प्रदेश के ब्राह्मण समाज ने जहां तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हरियाणा की भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कठघरे में खड़ा किया। एचएसएससी के माफी मांगने के बावजूद ब्राह्मण समाज जिम्मेदार आला अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि किसी प्रतियोगी परीक्षा में जाति से संबंधित विवादास्पद सवाल पूछा जाना बहुत ही निंदनीय है।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख व हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने शनिवार को एक ट्वीट कर कहा ‘खट्टर सरकार कर्मचारी चयन आयोग के ब्राह्मण समाज के लिए घृणित विचार, बेटियों के प्रति भी करते हैं दुर्भावना का वार, क्या शर्म भी बेच खाई है खट्टर सरकार, हरियाणा के तो नहीं हैं ऐसे संस्कार।ह्ण हरियाणा के पूर्व मंत्री शिवचरणलाल शर्मा ने कहा कि जाति व्यवस्था को लेकर ऐसी विवादित बातों से हमारे सामाजिक ढांचे पर आघात पहुंचता है। इससे बचने की जरूरत है।

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