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UGC के सर्कुलर का चौतरफा विरोध, जारी है बहिष्कार, DU शिक्षकों के समर्थन में आए राजनीतिक दल

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए सर्कुलर ‘यूजीसी रेगुलेशन (तीसरा संशोधन)2016’ के खिलाफ आंदोलनरत दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) व अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों के समर्थन में बुधवार को कई राजनीतिक दल आ गए।

Author नई दिल्ली | May 27, 2016 12:43 AM

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए सर्कुलर ‘यूजीसी रेगुलेशन (तीसरा संशोधन)2016’ के खिलाफ आंदोलनरत दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) व अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों के समर्थन में बुधवार को कई राजनीतिक दल आ गए। कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी ने मानव संसाधन मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप करने और यूजीसी के नए सर्कुलर को तुरंत वापस लेने की मांग की। उधर परिसर में सन्नाटा छाया रहा। डूटा के साथ सभी शिक्षक संगठन और दिल्ली यूनिवर्सिटी एडहौक टीचर्स फोरम ने बुधवार को तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों से संपर्क साधा।

इन्होंने गुरुवार को जंतर मंतर पर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों के बाबत लामबंदी की। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन व पूर्व दिल्ली सरकार की मंत्री डाक्टर किरण वालिया, इंटेक के अध्यक्ष अश्वनी शंकर व संयोजक पंकज गर्ग और विनय कुमार सिंह व महासचिव संजय वर्मा, एएम खान, प्रदीप कुमार और रितु गोयल ने प्रेस कांफ्रेस में केंद्र पर हमला बोला। कहा कि शिक्षकों के वर्कलोड बढ़ाने, उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को कठिन और अव्यावहारिक बनाने और विश्वविद्यालयों के एक तिहाई शिक्षकों को बेरोजगार बनाने वाले अधिसूचना के विरुद्ध देश भर के शिक्षक एकजुट हो रहे हैं।

कांग्रेस के शिक्षक संगठन इंटेक ने उच्च शिक्षा में 55 फीसद बजट की कटौती की भी की घोर निंदा की। यह बजट 9315 करोड़ से घटा कर 2016-17 में 4286 करोड़ कर दिया गया है। इंटक ने दावा किया कि यूजीसी की नई अधिसूचना बजट में की गई कटौती के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए है। 5000 पद दिल्ली विश्वविद्यालय से और एक लाख पद पूरे देश में खत्म किए जाने की योजना है। इंटेक ने 31 मई को मानव संसाधन मंत्रालय पर धरना देने की चेतावनी दी है।

उधर डीयू शिक्षकों के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों को बुधवार को विभिन्न विश्वविद्यालयों में भेजा गया। प्रो हंसराज सुमन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें केपी सिंह और रतनलाल शामिल थे, जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इग्नू, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, (रोहतक), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी आॅफ हरियाणा, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ) पंजाब विश्वविद्यालय (चंडीगढ़) आदि विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से मिले। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के एडहॉक फोरम के अध्यक्ष मुकेश मीणा और इस फोरम के महासचिव अनिल काला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों से मिला और उनसे इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की। एकेडमिक फोरम फॉर सोशल जस्टिस के अध्यक्ष केदार मंडल ने इस रेगुलेशन का कड़ा विरोध किया।
डूटा ने दावा किया कि विरोध की इस कड़ी में सभी शिक्षकों का पहले से ही परीक्षा-मूल्यांकन का बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी रहा। इस बाबत की गई डूटा की अपील पूरी तरह सफल रही। शिक्षक नेताओं ने शोधार्थियों से भी इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की।

डूटा की अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कहा, ‘घोषित किए पदोन्नति के मापदंड (एपीआइ) न सिर्फ विसंगतियों से भरपूर हैं बल्कि शिक्षा विरोधी भी हैं। शिक्षा की गुणवता का आधार सिर्फ घंटों की गिनती से नहीं बल्कि उससे जुड़े हुए तमाम प्रयासों की परिधि में ही देखा जाता रहा है। क्योंकि उच्च शिक्षा एक उद्योग नहीं है’। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के समन्वयक अनुराग मिश्र ने कहा कि इस अधिसूचना के अमल से उच्च शिक्षा की स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी।

आम आदमी पार्टी ने अपने बयान में कहा कि यह केंद्र का गैरजरूरी कदम है। मोदी सरकार भी पूर्व के यूपीए सरकार की तर्ज पर चल रही है। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के कार्यकाल में भी विश्वविद्यालयी शिक्षा पर हमला किया गया था। लेकिन डीयू के श्क्षिकों के विरोध के कारण वह सफल नहीं सका था।

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