ताज़ा खबर
 

अफ्रीकी देश ने पहचाना रेहान का हुनर

आप जब कोई लक्ष्य तय कर लेते हैं तो मुश्किल राह भी आसान हो जाती है, लेकिन इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की जरूरत होती है।

Author नई दिल्ली, 4 अगस्त। | August 5, 2018 4:08 AM
रेहान खान ने बताया कि बीते साल 23 जनवरी को उन्हें फिर जिबूती बुलाया गया। उन्होंने 11 जून तक सेना और पुलिस के 125 जवानों को प्रशिक्षित किया।

निर्भय कुमार पांडेय

आप जब कोई लक्ष्य तय कर लेते हैं तो मुश्किल राह भी आसान हो जाती है, लेकिन इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की जरूरत होती है। यह कहना है हौजरानी में रहने वाले चौथी कक्षा तक पढ़े मोटर मैकेनिक रेहान खान की। 45 साल के रेहान को बचपन से ही मोटरसाइकिल चलाने का शौक था, लेकिन पैसों की तंगी के कारण जब वे पढ़ ही नहीं पाए तो महंगी मोटरसाइकिल कहां से खरीदते? नौकरी की तलाश में उन्हें बचपन में ही दिल्ली का रुख करना पड़ा। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिस पर न केवल उनके परिवारवालों का, बल्कि पूरे देश को नाज है।

रेहान ने बताया कि छोटी उम्र में दिल्ली आने के बाद वे मालवीय नगर, हौजरानी में एक मोटर मैकेनिक की दुकान पर नौकरी करने लगे। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया, जब जिबूती दूतावास ने उनसे संपर्क किया और उन्हें जिबूती की स्वतंत्रता दिवस परेड में हिस्सा लेने वाले जवानों को प्रशिक्षित करने का मौका दिया। रेहान ने बताया कि पहली बार साल 2016 में उनके द्वारा प्रशिक्षित जवानों ने वहां के स्वतंत्रता दिवस पर मोटरसाइकिल से करतब दिखाया था।

करतब ने किया हैरान

रेहान खान ने बताया कि बीते साल 23 जनवरी को उन्हें फिर जिबूती बुलाया गया। उन्होंने 11 जून तक सेना और पुलिस के 125 जवानों को प्रशिक्षित किया। इन जवानों ने 27 जून को आयोजित स्वतंत्रता दिवस परेड में हिस्सा लिया और मोटरसाइकिल पर करतब दिखाकर सबका मन मोह लिया। रेहान ने बताया कि पिछली बार एक खास तरह का आयोजन भी किया गया था। एक मोटरसाइकिल पर तीन घूमते हुए जवानों ने करतब दिखाकर परेड देख रहे दर्शकों को अचंभित कर दिया। उनका कहना है कि यह दुनिया में पहली बार हुआ है कि किसी राष्ट्रीय आयोजन में एक मोटरसाइकिल पर करतब दिखाने वाले तीन लोग खुद-ब-खुद घूम रहे थे। हालांकि, उनको नियंत्रित करने के लिए दो अन्य लोग भी मोटरसाइिकल पर सवार थे।

ई-रिक्शा की मोटर का इस्तेमाल

रेहान ने कहा कि यह काम काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन लगन और मेहतन के बल पर मुश्किल से मुश्किल काम भी किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि इसके लिए मोटरसाइकिल को खास तरह से मोडीफाई किया गया था और उसमें कई सुरक्षा उपकरण लगाए गए थे। तीनों जवानों को घुमाने के लिए इसमें ई-रिक्शा की मोटर का इस्तेमाल किया गया था, जिसे वह अपने साथ भारत से ही लेकर गए थे।

बिजनौर से जिबूती का सफर

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले रेहान खान ने बताया कि जब सफर की शुरुआत की थी, तब वे अकेले थे। जब वे दिल्ली पहुंचे तो उनके सामने जीवनयापन की चुनौती थी। नया शहर था और जानने वाले काफी कम लोग थे। हालांकि, उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी लगन से मोटर मैकेनिक का काम सीखा। कुछ समय बाद उन्होंने एक मोटरसाइकिल खरीदी। रेहान अपनी टीम के साथ दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों में मोटरसाइकिल रैली निकालते थे और मोटरसाइकिल पर करतब भी दिखाते थे, लेकिन उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया, जब वह पूर्वी अफ्रीकी देश जिबूती के दूतावास ने उनसे संपर्क साधा और अपने देश के जवानों को मोटरसाइकिल पर करतब दिखाने के लिए प्रशिक्षित करने को कहा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App