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कवि व पत्रकार विष्णु खरे का निधन

हिंदी अकादमी, दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे का निधन बुधवार को हो गया।

Author नई दिल्ली, 19 सितंबर। | September 20, 2018 5:21 AM
विष्णु खरे की अविचल सामाजिक प्रतिबद्धता, धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील विश्व दृष्टि और जनविरोधी राजनीति के खिलाफ उनका गुस्सा उनके हर तरह के लेखन में मुखर रहा है।

हिंदी अकादमी, दिल्ली के उपाध्यक्ष विष्णु खरे का निधन बुधवार को हो गया। वे 78 वर्ष के थे। मस्तिष्क आघात के बाद जीबी पंत अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। खरे का जन्म मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में हुआ था। अपनी प्रयोगधर्मिता के कारण उन्हें हिंदी कविता का प्रतिनिधि और मजबूत आवाज कहा गया। वे पत्रकार के साथ एक बेहतरीन अनुवादक, फिल्म आलोचक और पटकथा लेखक भी थे। ‘काल और अवधि के दरमियान’, ‘खुद अपनी आंख से’, ‘पिछला बाकी’, ‘लालटेन जलाना’, ‘सब की आवाज के पर्दे में’, ‘आलोचना की पहली किताब’ उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल है। जनवादी लेखक संघ के मुरली मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा कि विष्णु खरे की अविचल सामाजिक प्रतिबद्धता, धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील विश्व दृष्टि और जनविरोधी राजनीति के खिलाफ उनका गुस्सा उनके हर तरह के लेखन में मुखर रहा है। उनका जाना हिंदी साहित्य के लिए बड़ी क्षति है।

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