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सीएम केजरीवाल के केंद्र के नसीहत- 12% GST लगाओ, आधा-आधा बांट लो

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 28 फीसद और 18 फीसद कर निर्धारण की वजह से मध्यम व छोटे दर्जे के करीब 50 फीसद उद्योग धंधे बंद हो गए हैं और हजारों नौजवानों को बेरोजगार होना पड़ा है।

Author नई दिल्ली | November 8, 2017 4:02 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

माल व सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर हुए बुरे प्रभावों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 28 फीसद और 18 फीसद कर निर्धारण की वजह से मध्यम व छोटे दर्जे के करीब 50 फीसद उद्योग धंधे बंद हो गए हैं और हजारों नौजवानों को बेरोजगार होना पड़ा है। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत दी कि जीएसटी की दर को 12 फीसदी रखा जाए। इसमें से आधा केंद्र रख ले और आधा राज्यों को दे दे।  कल यानी 9 नवंबर को गुवाहाटी में हो रही जीएसटी परिषद की बैठक से पहले मंगलवार को व्यापारियों के साथ हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि छह फीसद कर केंद्र के लिए और इतना ही राज्यों के लिए पर्याप्त है। इस आयोजन में मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और व्यापार व कर आयुक्त राजेश प्रसाद सहित दिल्ली के करीब 300 व्यापारियों ने हिस्सा लिया।

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दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने जीएसटी को लेकर व्यापारियों का पक्ष जाना और उनकी परेशानियों को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस मौके पर व्यापारियों की ओर से सिसोदिया को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें नौ खास मुद्दों की चर्चा की गई है जिन्हें वे आगामी 9 नवंबर की जीएसटी परिषद की बैठक में उठाएंगे। वित्त विभाग संभालने वाले उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि जीएसटी में रिटर्न सभी व्यापारियों के लिए तिमाही होनी चाहिए। चाहे वे डेढ़ करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले डीलर हों या डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले डीलर। उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत की चीजों जैसे बच्चों के खिलौने व चॉकलेट, सीमेंट, आॅटो पार्ट्स, टू व्हीलर पार्ट्स, फर्नीचर, हार्डवेयर व बाथरूम फिटिंग, इलेक्ट्रिक आइटम, मार्बल व प्लास्टिक पार्ट्स आदि को 28 फीसद कर श्रेणी में रखे जाने का विरोध किया और कहा कि वे 9 नवंबर की जीएसटी परिषद की बैठक में इन वस्तुओं पर कर कम करने की मांग करेंगे।

 

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