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रियल एस्टेट: जीएसटी का असर, खरीदारों पर बढ़ेगा भार

तैयार हो चुकी परियोजनाओं के खरीदारों पर जीएसटी का भार डालने से अभी ज्यादातर बिल्डर कंपनियां मना कर रही हैं। दूसरी तरफ, निर्माणाधीन इमारतों में निवेश करने के इच्छुक लोगों की जेब पर जीएसटी लागू होने का असर पड़ना तय है।

नोएडा | July 4, 2017 4:32 AM
इस कानून का लगभग देश की 76 हजार 44 रियल एस्टेट कंपनियों पर पड़ेगा।

एक जुलाई से लागू हुए जीएसटी के समीकरण को समझने और इसके असर के आंकलन में कारोबारी, व्यापारी से लेकर आम आदमी तक फंसा हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद फ्लैट व जमीन की कीमत बढ़ेगी या घटेगी? इसको लेकर समूचा रियल एस्टेट सेक्टर पशोपेश में है। बताया गया है कि जीएसटी लागू होने के बाद फ्लैट बनाने में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट और लोहे-सरिया पर 5-6 फीसद कर बढ़ गया है। इसके अलावा कई अन्य मदों में भी बढ़ोतरी से बिल्डरों पर भार बढ़ गया है। इस भार को अगर बिल्डर कंपनियां खरीदारों पर डालेंगी, तो आबंटियों की जेब पर इसका असर पड़ेगा। हालांकि तैयार हो चुकी परियोजनाओं के खरीदारों पर जीएसटी का भार डालने से अभी ज्यादातर बिल्डर कंपनियां मना कर रही हैं। दूसरी तरफ, निर्माणाधीन इमारतों में निवेश करने के इच्छुक लोगों की जेब पर जीएसटी लागू होने का असर पड़ना तय है।

जानकारों के मुताबिक, बिल्डर परियोजनाओं की निर्माणाधीन इमारतों को अभी तक एक वर्क कॉन्ट्रैक्ट (काम का ठेका) की तरह माना जाता था, जहां जमीन के अलावा सीमेंट, लोहा-सरिया समेत अन्य वस्तुएं और सेवाएं आती थीं। यहां सेवाकर कुल लागत के 60 फीसद हिस्से पर नहीं लगता था। लागत के केवल 40 फीसद हिस्से पर ही सेवाकर लगता था, जो कुल लागत पर महज 6 फीसद होता है। इसके अलावा खरीदार को 1 फीसद के हिसाब से वैट देना होता था। वहीं जीएसटी लागू होने के बाद वर्क कॉन्ट्रैक्ट के साथ निर्माणाधीन इमारतों की बिक्री को सेवाओं के तहत माना गया है, जिसके बाद कुल कर 6 फीसद से बढ़कर 12 से 18 फीसद के बीच हो जाएगा। यानी जीएसटी लागू होने के बाद 6-12 फीसद तक भार बढ़ेगा। रियल एस्टेट क्षेत्र में मौजूदा मंदी के चलते माना जा रहा है कि ज्यादातर तैयार हो चुकी परियोजनाओं के खरीदारों पर बिल्डर कंपनियां भार नहीं डालेंगी और बढ़े हुए कर को खुद वहन करेंगी।

सेक्टर-29 के प्रॉपर्टी कारोबारी विजय चौहान ने बताया कि जीएसटी लागू होने से खरीदारों को न फायदा है और न ही नुकसान। जिस कीमत पर जमीन या फ्लैट पहले मिल रहा था, जीएसटी लागू होने के बाद भी उसी कीमत पर मिलेगा। वहीं, गार्डिनिया बिल्डर कंपनी के निदेशक अमित कुमार ने बताया कि खरीदारों को जीएसटी से कोई फायदा नहीं हुआ है, उल्टा बिल्डरों पर इसका भार जरूर बढ़ गया है। सीमेंट व लोहे पर कर बढ़ने के अलावा कई अन्य मदों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अगर बिल्डर कंपनियां इस भार को खरीदारों पर डालेंगी, तो फ्लैटों के एवज में भुगतान ज्यादा करना पड़ेगा।

 

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