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टैक्‍स, कमीशन हटा दें तो सिर्फ 34 रुपए में एक लीटर पेट्रोल! सरकार ने लोकसभा में दी जानकारी

शु्क्रवार (21 दिसंबर, 2018) को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने और इसके 55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने पर भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कुछ कम किए गए।

petrol and dieselतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत निचले स्तर पर स्थिर रहने पर भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत अधिक होने पर केंद्र सरकार ने संसद में सफाई दी है। सरकार ने संसद में बताया कि टैक्स और डीलर कमिशन को हटा दें तो भारत में एक लीटर पेट्रोल की कीमत महज 34 रुपए होती है। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने लिखित में पेट्रोलियम कीमतों की जानकारी दी। इसमें उन्होंने कहा कि टैक्स और डीलर्स कमिशन एक लीटर पेट्रोल पर 96.9 फीसदी पड़ता है जबकि एक लीटर डीजल पर यह 60.3 फीसदी लगता है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक अगर पेट्रोल और डीजल पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाए तो यह क्रमश: 34.04 व 38.67 प्रति लीटर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि व्यवहारिक रूप से 100 फीसदी टैक्स और कमिशन खत्म करना संभव नहीं है।

बता दें कि शु्क्रवार (21 दिसंबर, 2018) को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने और इसके 55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने पर भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कुछ कम किए गए। दिल्ली में इस दिन पेट्रोल 70.46 और डीजल 64.39 रुपए प्रति लीटर बेचा गया। पता होना चाहिए कि इस साल अक्टूबर में जब कच्चे तेल की कीमत 84-85 प्रति डॉलर तक पहुंच गई तब सरकार ने उत्पाद शुल्क कम कर पेट्रोल और डीजल पर 1.5 रुपए प्रति लीटर की राहत दी थी।

इसके अलावा तेल कंपनियों से भी एक रुपए कम करने को कहा। बाद में सरकार के निर्णय के बाद कुछ राज्यों सरकारों ने प्रति लीटर 2.5 रुपए वैट करने कम करने की घोषणा की थी। बाद में उत्पाद शुल्क में कमी करने के चलते कुछ अर्थशास्त्रियों ने सरकारी खजाने में कटौती होने के चलते चिंता जाहिर की थी। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्पाद शुल्क में कमी के चलते सरकार को 70 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

एक अन्य सवाल के जवाब में  शुक्ला ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में ई-वे बिल के नाम पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी के 1100 मामले सामने आए हैं। लोकसभा में संतोष अहलावत और आर. गोपालकृष्णन इस मामले सवाल पूछा था। उन्होंने बताया कि 2018-19 (नवंबर महीने तक) ई-वे बिल के नाम पर जीएसटी की चोरी के 100 मामले सामने हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में 27.64 करोड़ रुपए की कर चोरी का पता चला और 10.97 करोड़ रुपए की वसूली की गई तथा 20.38 करोड़ का जुर्माना भी वूसला गया।

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