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10वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को नहीं दे रहे दाखिला

दिल्ली के सरकारी स्कूलों से इस साल दसवीं की परीक्षा में उतीर्ण रहने से चूके हजारों बच्चों का भविष्य ‘स्कूलों के रवैये’ के कारण अधर में लटका है।

Author नई दिल्ली, 22 अगस्त। | August 23, 2018 6:42 AM
स्कूलों को यह कहते हुए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है कि दसवीं की मुख्य और पूरक परीक्षाओं में अनुतीर्ण विद्यार्थियों को पुन: दाखिला नहीं दिया जाना संविधान की धारा 14 व 21 और दिल्ली स्कूली शिक्षा अधिनियम,1973 के नियम 138 का उल्लंघन है।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों से इस साल दसवीं की परीक्षा में उतीर्ण रहने से चूके हजारों बच्चों का भविष्य ‘स्कूलों के रवैये’ के कारण अधर में लटका है। इनमें से कुछ बच्चों ने कानून की शरण ली है जिसके बाद स्कूलों को यह कहते हुए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है कि दसवीं की मुख्य और पूरक परीक्षाओं में अनुतीर्ण विद्यार्थियों को पुन: दाखिला नहीं दिया जाना संविधान की धारा 14 व 21 और दिल्ली स्कूली शिक्षा अधिनियम,1973 के नियम 138 का उल्लंघन है। गौरतलब है कि साल 2018 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों से कक्षा दसवीं में शामिल होने वाले कुल 136663 छात्रों में से 94160 छात्र पास हुए और 42503 विद्यार्थी फेल हुए।

सर्वोदय कन्या विद्यालय, गोकलपुर गांव की रीमा (बदला हुआ नाम) दसवीं की परीक्षा में सामाजिक विज्ञान और गणीत में अनुतीर्ण रहीं जिसमें उन्होंने पूरक परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हो सकी। अब स्कूल उन्हें दाखिला नहीं दे रहा है। रीमा ने कहा, ‘प्रिंसिपल कह रहे हैं कि पूरक वालों को दाखिला नहीं मिलेगा, फेल वालों को मिलेगा, खुला विद्यालय स्कूल से पढ़ो नहीं तो सीबीएसई बोर्ड के पास जाओ, 160 बच्चे हैं, पांचवी से 9वीं कक्षा तक को स्कूल में पढ़ाई अच्छी थी, पर दसवीं में अच्छी नहीं हुई’। रीमा चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर हैं। पिता मजदूरी करते हैं। रीमा की मां ने कहा, ‘पिछले 10 दिनों से धक्के खा रही हूं, रोज प्रिंसिपल से मिल रही हूं। उल्टा प्रिंसिपल का जवाब है कि भागो यहां से, तुम लोगों के लिए यह जगह नहीं है, पढ़ने वाले बच्चों को देखेंगे, तूम लोगों को नहीं रखेंगे। दूसरे स्कूल वाले लेंगे नहीं, निजी स्कूल में पढ़ाने की औकात नहीं है, तो जाएं कहां’। उसी स्कूल की संतोष की कहानी भी यही है। पांच भाई-बहनों में केवल संतोष और उसका सबसे छोटा भाई पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन अब संतोष का भविष्य भी अधर में है। संतोष के पिता भी मजदूरी करते हैं।

इन बच्चों की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता और अखिल भारतीय अभिभावक संघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि 500 बच्चों की सूचि कोर्ट में दी हुई है। लेकिन, लगभग सभी 42503 विद्यार्थियों की कहानी यही है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं और लड़कियां हैं। बच्चे हतोत्साहित होकर स्थानांतरण सर्टिफीकेट ले रहे हैं, एनआइओएस (खुला विद्यालय) में दाखिला ले रहे हैं जो उनके हक में नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल इन अनुतीर्ण बच्चों को कक्षा दसवीं के सत्र 2018-19 के पुन: दाखिला देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। लेकिन विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, दाखिला नहीं दिया जा रहा है और स्कूल प्राध्यापकों द्वारा भ्रमित किया जा रहा है।

अशोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि यह सब सरकार की गुपचुप नीति है, स्कूलों के अंदर से बच्चों को निकालो और बाहर वालों को दाखिला नहीं लो तो स्कूल का प्रदर्शन अच्छा हो जाएगा, विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात बेहतर हो जाएगा और कमजोर बच्चों को निकाल दो तो रिजल्ट भी अच्छा हो जाएगा। अशोक अग्रवाल के माध्यम से सर्वोदय कन्या विद्यालय, गोकलपुर गांव को भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि स्कूल सभी बच्चों को फिर से दाखिला दे नहीं तो कानून सम्मत कार्रवाई के लिए तैयार रहें। वह अन्य स्कूलों के विद्यार्थियों को भी कानून का सहारा लेने की अपील कर रहे हैं।

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