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सर्विस चार्ज लेने वाले रेस्तरां पर नकेल कसने की तैयारी में सरकार, पर निजी अस्पतालों में इलाज कराने वालों को मार

नई दिल्लीः अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए आईसीयू को छोड़कर 5,000 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों पर पांच फीसदी जीएसटी देना होगा। यानि निजी अस्पतालों में इजाज आपके लिए महंगा होने जा रहे है।

Government Hospital, NHFS
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है(फोटो सोर्स: ANI)।

खान-पान के बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने वाले होटल व रेस्तरां मालिकों में सरकार नकेल कसने की तैयारी में है। ग्राहकों को सर्विस चार्ज वसूलने वाले होटल व रेस्तरां मालिकों के खिलाफ कंज्यूमर फोरम में अपील का अधिकार देने की कवायद चल रही है। नई गाईड लाइन के जरिये सरकार ऐसा करने जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ सरकार निजी अस्पताल में उपचार को और ज्यादा महंगा करके आम आदमी की कमर तोड़ रही है।

नए फैसले के लागू होने के बाद ग्राहक सर्विस चार्ज के खिलाफ उपभोक्ता फोरम के साथ सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटक्शन अथॉरिटी (CCPA) में भी अपील कर सकेंगे। अभी तक कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट में इस तरह की अपील का प्रावधान नहीं था। इससे पहले 2017 में जो एडवाइजरी जारी की गई थी उसमें बिल में सर्विस चार्ज जोड़ने का कॉलम वैकल्पिक था।

कुछ अरसा पहले केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि रेस्टोरेंट खाने पीने के बिल में सर्विस चार्ज (सेवा शुल्क) नहीं जोड़ सकते। उन्होंने कहा कि अगर रेस्टोरेंट मालिक अपने कर्मचारियों को ज्यादा वेतन देना चाहते हैं तो वो खाने पीने के सामानों की दरें बढ़ाने के लिए आजाद हैं। इसकी वजह यह है कि देश में खानपान की कीमतों पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने रेस्टोरेंट मालिकों की उस आशंका को खारिज कर दिया कि सेवा शुल्क हटाए जाने की स्थिति में उन्हें घाटा होने लगेगा।

मंत्रालय ने रेस्टोरेंट चलाने वालों संगठनों व ग्राहकों के समूहों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद कहा था कि खानपान के बिल में सेवा शुल्क लगाने से रेस्त्रां को रोकने के लिए सरकार जल्द ही एक कानून लेकर आएगी। हालांकि फेडरेशन ऑफ होटेल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) का कहना है कि सर्विस चार्ज लेना गलत नहीं है, क्योंकि इसकी जानकारी पहले से ही कस्टमर को दी जाती है। किसी तरह का गोरखधंधा इसमें नहीं होता। यह पैसा स्टाफ वेलफेयर के लिए काम आता है।

उधर, सर्विस चार्ज से राहत देने की तैयारी में जुटी सरकार ने आम आदमी की कमर तोड़ने वाला फैसला लिया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए आईसीयू को छोड़कर 5,000 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों पर पांच फीसदी जीएसटी देना होगा। यानि निजी अस्पतालों में इलाज आपके लिए महंगा होने जा रहे है। आम आदमी को ये झटका 18 जुलाई से लगने वाला है। आम आदमी पहले ही महंगाई से परेशान है लेकिन जीएसटी काउंसिल के फैसलों से महंगाई के और बढ़ने की संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की दो दिनों की बैठक में ने निर्णय लिया गया है।

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