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वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले- सरकार को आरबीआई के फंड की जरुरत नहीं

वित्त मंत्री ने विपक्षी पार्टियों के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि केंद्र साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विभिन्न योजनाओं को फंड देने के लिए आरबीआई तक पहुंचने की कोशिश में थी।

Arun Jaitley, Finance Minister, Reserve Bank of India, RBI, Bad Loan, NPA Crisis, Banking Industry, Tension, Finance Ministry, RBI, Autonomy, Monetary Policy Makers, India Leadership Summit, US-India Strategic Partnership Forum, CAG, RBI Deputy Governor, Viral V Acharya, National News, Hindi Newsवित्त मंत्री अरुण जेटली। (फोटोः पीटीआई)

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि अगले छह महीने में सरकार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से पैसों की जरुरत नहीं। शुक्रवार (23 नवंबर, 2018) को टेलीकास्ट हुए एक टीवी साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने विपक्षी पार्टियों के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया कि केंद्र साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विभिन्न योजनाओं को फंड देने के लिए आरबीआई तक पहुंचने की कोशिश में थी। टाइम्स नाऊ चैनल को दिए साक्षात्कार में अरुण जेटली ने कहा, ‘मुझे अगले छह महीनों तक पैसों की जरुरत नहीं।’

बता दें कि केंद्र पर विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि सरकार आरबीआई के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के इस आरोप पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘हमारी सरकार ने आरबीआई की आजादी का पूरा सम्मान किया।’ उन्होंने कहा कि हम आरबीआई की स्वायत्ता का सम्मान करते हैं लेकिन उसी समय पर, अगर कुछ सेक्टर्स को नकदी की जरुरत है। हम उन मुद्दों को उठाएंगे। हम आरबीआई के साथ ऐसा करते हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रिजर्व बैंक और सरकार के बीच संबंधों में कथित टकराव को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि पिछली संप्रग सरकार के समय वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर मिल जुल कर चलते थे। उन्होंने इस सरकार के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ऊंचे आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब घरेलू बचत, औद्योगिक कर्ज, निर्यात वृद्धि तथा रुपए की विनिमय दर में गिरावट तथा रोजगार सृजन जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों में नरमी है, तब उच्च वृद्धि दर के आंकड़े समझ से परे है।

चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘…सामान्य रूप से वित्त मंत्री और गवर्नर हर सप्ताह बात करते हैं, प्रत्येक महीने मुलाकात करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक की बैठकों तथा कई अन्य मौकों पर मिलकर काम करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पर राजग सरकार में वे साथ मिलकर काम नहीं कर रहे। राजग सरकार और पूर्व संप्रग सरकार में यही अंतर है। हमेशा से सरकार की अपनी सोच रही है तथा आरबीआई के अपने विचार रहे हैं।’’ चिदंबरम ने कहा कि कभी भी ऐसी स्थिति नहीं आई जब आरबीआई कानून की धारा 7 लगाने की धमकी दी गई हो या केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल की बैठक नौ घंटे तक चली हो। (एजेंसी इनपुट सहित)

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