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20 से 30 स्‍मार्टफोन रखते हैं पिचाई, जानें गूगल के सीईओ की अपने बारे में बताई 5 दिलचस्‍प बातें

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के स्‍टूडेंट्स से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्‍होंने खुद से जुड़ी कई दिलचस्‍प बातें बताईं।

Author नई दिल्‍ली | December 17, 2015 9:26 PM
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को एसआरसीसी दिल्‍ली में स्‍टूडेंट्स से बातचीत की।

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई गुरुवार को दिल्‍ली में थे। यहां उन्‍होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के स्‍टूडेंट्स से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्‍होंने खुद से जुड़ी कई दिलचस्‍प बातें बताईं।

1. पिचाई ने कहा कि वह बचपन में क्रिकेटर बनना चाहते थे और उनकी ख्वाहिश सुनील गावस्कर जैसा बनने की थी। उन्होंने कहा ,‘‘कई भारतीयों की तरह मेरा भी सपना क्रिकेटर बनने का था। मैं सुनील गावस्कर का बड़ा प्रशंसक था और बाद में सचिन तेंदुलकर का मुरीद बना।’’

2. उन्होंने कहा कि उन्हें टेस्ट और वनडे मैचों में मजा आता है लेकिन टी20 मैच उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने कहा,‘‘ मेरा हमेशा से मानना रहा है कि टेस्ट क्रिकेट अद्भुत है। मुझे इसे देखने का समय भी मिला लेकिन टी20 मुझे उतना पसंद नहीं है।’’ पिचाई ने यह भी कहा कि वह फुटबाल और बार्सीलोना के स्टार लियोनेल मेस्सी के प्रशंसक हैं।

3. पिचाई से जब पूछा गया कि उन्‍हें 12वीं में कितने नंबर मिले थे, उन्‍होंने कहा, ”इतने नहीं कि श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला मिल सके।”

4. पिचाई से पूछा गया कि अगर वे गूगल के सीईओ नहीं होते तो क्‍या होते? उन्‍होंने कहा कि वे अब भी सॉफ्टवेयर बना रहे होते।

5. पिचाई से पूछा गया कि उन्‍होंने पहला मोबाइल फोन कौन सा खरीदा था? गूगल सीईओ के मुताबिक, उन्‍होंने पहला फोन 1995 में मोटोरोला कंपनी का खरीदा था। 2006 में पहला स्‍मार्टफोन खरीदा। उन्‍होंने यह भी बताया कि उनके पास 20 से 30 स्‍मार्टफोन हैं।
और क्‍या कहा पिचाई ने

पिचाई ने कहा कि एक मजबूत मोबाइल डिवाइस बाजार तथा तकनीक में रफ्तार के चलते भारत में उत्पादों का विकास कर उन्हें वैश्विक स्तर पर पेश किए जाने का अच्छा मौका है। भारतीय मूल के पिचाई ने इसके साथ ही भारतीय शिक्षण प्रणाली में रचनात्मकता व प्रयोग के जरिए प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया।

भारत में शिक्षा प्रणाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रणाली को ‘रचनात्मक व प्रयोग के जरिए शिक्षा‘ को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कड़े अकादमिक ज्ञान पर जोर दिया जाता है जबकि अमेरिका में शिक्षा अधिक प्रयोगात्मक है। उनके मुताबिक, ‘‘यही बड़ा अंतर है।’’

क्या गूगल अपने लोकप्रिय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड का नाम किसी भारतीय मिठाई पर रखेगी? पिचाई से जब यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे इस पर तो अपनी मां से सुझाव मांगेंगे। इसके अलावा, गूगल नाम का फैसला करने के लिए ऑनलाइन चुनाव भी करवा सकती है। कार्यक्रम में एंड्रॉयड के लिए कुछ भारतीय नाम सुझाए गए जिनमें पेड़ा, नेयाप्पम, नानखटाई शामिल है। बता दें कि एंड्रॉयड ओएस के अब तक के वर्जन के नाम डोनट, एकलेयर, जिंजरब्रेड, आइसक्रीम सैंडविच, जेली बीन, किटकैट और लॉलीपाप जैसी खाने पीने की चीजों के नाम पर रखे गए हैं। इसका लेटेस्‍ट वर्जन मार्शमैलो है।

गूगल के सीईओ की श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के स्‍टूडेंट्स से बातचीत का पूरा वीडियो देखने के लिए नीचे क्‍ल‍िक करें 

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