‘आप’ की गाड़ी को कितना आगे ले जाएगी महिलाओं की मुफ्त सवारी

दूसरी बार बिजली-पानी सस्ता करने के नाम पर फरवरी 2015 में प्रचंड बहुमत से सरकार बनी तो आम आदमी पार्टी ने अपने 70 सूत्री एजेंडे को लागू करने की बात कही। इस बार तो उन्हें उन कामों का हिसाब भी लोगों को देना होगा।

इसे लागू करने पर सरकार को करीब सात सौ करोड़ रुपए की सबसिडी देनी पड़ेगी।

तय समय से तीन महीने पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव करवाने की चुनाव आयोग की चर्चा के बाद आम आदमी पार्टी (आप) को महिलाओं को दिल्ली मेट्रो और बसों में मुफ्त यात्रा देने की घोषणा करनी पड़ी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को यह घोषणा करते हुए बताया कि इसे तीन महीने में लागू कर दिया जाएगा। इस वित्तीय साल के बाकी महीनों में इसे लागू करने पर सरकार को करीब सात सौ करोड़ रुपए की सबसिडी देनी पड़ेगी। इस एलान से लग रहा कि दिल्ली सरकार पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। फरवरी 2015 के लोक सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को प्रचंड जीत मिली थी। उसे 70 सदस्यों वाली विधान सभा में 67 सीटें और 54 फीसद वोट मिले थे।

आम आदमी पार्टी 2015 के विधान सभा चुनाव से पहले 2014 के विधान सभा चुनाव में भी दिल्ली में कोई सीट नहीं जीत पाई थी। इसके बावजूद 33 फीसद वोट लाकर वह हर सीट पर नंबर दो रही और कांग्रेस को हाशिए पर पहुंचा दिया। इस बार आम आदमी पार्टी को सबसे कम करीब 18 फीसद वोट मिले। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सरकार के सात में से पांच मंत्रियों के इलाके में आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही।

2015 के विधान सभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी का राजनीतिक ग्राफ लगातार गिर रहा है। हर बार बिजली हाफ और पानी माफ जैसे मुद्दे खोजने आसान नहीं होंगे। 2015 में आम आदमी पार्टी को जिन बिरादरियों ने सबसे ज्यादा साथ दिया था उनमें पूर्वांचल के प्रवासी (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि के मूल निवासी), दलित(गरीब बस्तियों के लोग) और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे।

माना जा रहा है कि हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में अक्तूबर के आखिर या नवंबर के शुरू में विधान सभा चुनाव होंगे। उसके दो महीने बाद ही दिल्ली विधान सभा के चुनाव होने वाले हैं। तीनों राज्यों के साथ दिल्ली में चुनाव करवाने की चुनाव आयोग की तैयारी से घबड़ाई आम आदमी पार्टी ने पहले चुनाव करवाने का विरोध किया। पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज की टिप्पणी के बाद दिल्ली का राजनीतिक माहौल गर्म होने लगा।

संविधान के जानकार और दिल्ली विधान सभा के लंबे समय तक सचिव रहे सुदर्शन कुमार शर्मा ने कहा कि यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है कि वह किसी भी विधान सभा का कार्यकाल छह महीने से कम बचा हो तो अपनी सुविध से चुनाव पहले भी करा सकता है। चुनाव आयोग के लिए आसान होगा कि तीन राज्यों के साथ दिल्ली के चुनाव पहले कराए जाएं। ऐसा कई बार पहले भी हो चुका है। दो महीने बाद फिर से चुनाव की प्रक्रिया शुरू करना वैसे भी अक्लमंदी नहीं है। लोक सभा चुनाव संपन्न होने के छह महीने बाद चार विधान सभाओं के चुनाव होने से चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों दोनों को सुविधा होगी। वैसे अभी चुनाव आयोग ने इस बारे कोई टिप्पणी नहीं की है।

इस माहौल में महिलाओं को मेट्रो की फ्री यात्रा कितनी कारगर होगी यह तो समय बताएगा। वैसे अभी उसे लागू करने में तमाम दिक्कतें आने वाली हैं। किस तरह से मेट्रो में प्रवेश के लिए महिलाओं को मुफ्त टोकन दिया जाएगा और किस तरह से उसका दुरुपयोग रोका जाएगा। जिस मेट्रो में दिल्ली के विधायकों तक के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं है, उसमें लाखों महिलाओं को फ्री यात्रा करवाकर करोड़ों की सबसिडी आम लोगों से वसूले जाने का लोग कितना समर्थन करेंगे।

दूसरी बार बिजली-पानी सस्ता करने के नाम पर फरवरी 2015 में प्रचंड बहुमत से सरकार बनी तो आम आदमी पार्टी ने अपने 70 सूत्री एजेंडे को लागू करने की बात कही। इस बार तो उन्हें उन कामों का हिसाब भी लोगों को देना होगा। पहले हर मुद्दे पर लोगों से संवाद करने और धरना प्रदर्शन करने वाली पार्टी का दोबारा सत्ता में जाने के बाद काम करने का तरीका बदला और इसी का परिणाम माना जा रहा है कि उनका राजनीतिक ग्राफ गिरने लगा।

पंजाब विधान सभा चुनाव से वे कमजोर होने लगे और दिल्ली में राजौरी गार्डन विधान सभा चुनाव से और 2017 के नगर निगमों के चुनाव में तो जिस कांग्रस को आम आदमी पार्टी ने हाशिए पर ला दिया था, वह बराबरी पर आने लगी। एक मंत्री जाली प्रमाणपत्र के चक्कर में तो दूसरे रिश्वत लेने के आरोप में तो तीसरे सेक्स कांड में फंस चुके थे। इसके अलावा अनेक मामलों में अनेक नेता फंसते ही जा रहे थे।

पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बोलने पर अनेक बड़े नेताओं को पार्टी से निकाले जाने के बाद तो पार्टी के छोटे नेताओं की कोई हैसियत न रही। इसी से परेशान सुल्तानपुरी के विधायक और मंत्री रहे संदीप कुमार बसपा में शामिल हो गए। मटिया महल के विधायक और मंत्री रहे असीम अहमद खान और चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा के किसी भी दिन कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

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