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भारत ने फ्रांस से कहा, जांच करा कर बताएं

भारतीय नौसेना ने फ्रांसीसी आयुध महानिदेशालय के समक्ष स्कॉर्पीन पनडुब्बी से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लीक होने का मुद्दा उठाया है।

Author नई दिल्ली | Published on: August 26, 2016 1:45 AM
(photo-Agency)

भारतीय नौसेना ने फ्रांसीसी आयुध महानिदेशालय के समक्ष स्कॉर्पीन पनडुब्बी से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लीक होने का मुद्दा उठाया है। नौसेना ने कहा है कि उसने फ्रांस सरकार से इस घटना की तत्काल जांच कराने और अपने तथ्यों को भारतीय पक्ष के साथ साझा करने का अनुरोध भी किया है। इस बात का पता लगाने के लिए कि कहीं सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता तो नहीं किया गया है, एक आंतरिक आॅडिट की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इस बीच, मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने गुरुवार को कहा कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी से संबंधित अहम जानकारियां उसकी ओर से लीक नहीं हुई हैं। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले की जांच में नौसेना की मदद कर रही है।

नौसेना ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि रिपोर्टों की प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए इस मुद्दे को संबंधित विदेशी सरकारों के साथ कूटनीतिक रास्तों के जरिए उठाया जा रहा है। भारत सरकार यह भी पता लगा रही है कि अगर दस्तावेजों, जैसा कि दावा किया जा रहा है कि आॅस्ट्रेलियाई सूत्रों के पास मौजूद हैं, के साथ किसी भी तरह का समझौता हुआ है तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। लीक की खबर आते ही रक्षा मंत्रालय में इस मुद्दे पर कई बैठकें हुर्इं। नौसेना प्रमुख सुनील लांबा सहित अन्य शीर्ष अधिकारी रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर को नियमित तौर पर इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि अगर जरूरत पड़ी है तो लीक से संबंधित तथ्यों की पुष्टि के लिए एक भारतीय दल को विदेश भेजा जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक अगले महीने के मध्य तक पर्रीकर के समक्ष एक औपचारिक रिपोर्ट पेश की जा सकती है। नौसेना ने कहा है, एक आॅस्ट्रेलियाई समाचार एजंसी की वेबसाइट पर जो दस्तावेज पोस्ट किए गए हैं हमने उनकी जांच की है। इनके कारण सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है क्योंकि आवश्यक तथ्यों को छिपा दिया गया है। आॅस्ट्रेलियाई अखबार ‘द आॅस्टेÑलियन’ ने उसके पास मौजूद 22400 पन्नों में से सिर्फ कुछ पन्नों को ही सार्वजनिक किया है। भारत की सुरक्षा को खतरे के मद्देनजर अखबार ने जरूरी जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। बुधवार को अधिकारियों ने लीक से होने वाले असर को कम करके दिखाने की कोशिश करते हुए तर्क दिया था कि लीक हुए दस्तावेज पुरानी पड़ चुकी तकनीकी नियमावली हैं और यह भारत में निर्मित स्कॉर्पीन पनडुब्बी की विशेषताओं से काफी हद तक अलग हैं।

आॅस्ट्रेलियाई अखबार ने जिन दस्तावेजों को पोस्ट किया है, उनमें से कुछ पर भारतीय नौसेना का चिह्न भी है। इन दस्तावेजों में युद्ध प्रबंध प्रणाली से संबंधित संचालन दिशा-निर्देश नियमावली भी शामिल हैं। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये दस्तावेज डीसीएनएस, भारतीय नौसेना और एमडीएल में से किसके पास थे। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तब तक किसी को भी पता नहीं चल पाएगा जब तक कि फ्रांसीसी और भारत सरकार व कंपनियां यह पता लगाएं कि उनके बीच कौन सी जानकारियां साझा हुई हैं। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि लीक कहां से हुआ है। भारतीय एजंसियों को भी अपने सिस्टम के भीतर इसी प्रक्रिया को अंजाम देना होगा।

इस बीच मुंबई में मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने गुरुवार को कहा कि स्कॉर्पीन पनडुब्बी से संबंधित अहम जानकारियां उसकी ओर से लीक नहीं हुई हैं। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले की जांच में नौसेना की सहायता कर रही है। स्कॉर्पीन पनडुब्बी का निर्माण एमडीएल में ही किया जा रहा है। एमडीएल के एक अधिकारी ने कहा कि आंकड़ों की सुरक्षा के लिए एमडीएल में कड़े मानक हैं। उन्होंने बताया-‘जांच में हम नौसेना की मदद कर रहे हैं। हम यह पक्के तौर पर मानते हैं कि हमारी ओर से कोई जानकारी लीक नहीं हुई।’ इस अधिकारी ने कहा-‘यह जांच करने की जरूरत है कि क्या लीक हुए दस्तावेज असली हैं।’

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