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दिल्ली: टंकी सफाई करने उतरे 4 कर्मचारियों की मौत

बाहर खड़े लोगोें को जब यह अहसास हुआ कि टैंक के अंदर गए मजदूरों की कोई आवाज नहीं आ रही तो उन्होंने भीतर झांका।
Author नई दिल्ली | July 16, 2017 03:03 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी इलाके में एक सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान चार सफाई कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई। वहीं एक की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला पुलिस उपायुक्त ईश्वर सिंह ने कहा कि निर्माणाधीन मकान के मालिक जेके मेहता, उनके कर्मचारियों के खिलाफ धारा 304, 308 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उपायुक्त ने बताया कि शनिवार सुबह पुलिस नियंत्रण कक्ष में फोन आया कि महरौली के घिटोरनी इलाके में पानी के टैंक की सफाई कर रहे चार सफाई कर्मियों की मौत हो गई है। हादसा यहां के मेहता फार्म में हुआ। फार्म में स्थित कई टैंकों में से एक टैंक की सफाई के लिए पांच मजदूरों को लगाया गया था। वे सफाई के लिए टैंक के भीतर उतरे और बहुत देर तक उसी में फंसे रहे। बाहर खड़े लोगोें को जब यह अहसास हुआ कि टैंक के अंदर गए मजदूरों की कोई आवाज नहीं आ रही तो उन्होंने भीतर झांका। अंदर सभी मजदूरों को बेहोशी की हालत में देख लोगों ने तुरंत दिल्ली फायर और पुलिस को सूचना दी। दिल्ली फायर का बचाव दल और दो दमकलों ने स्थानीय पुलिस की मदद से काफी देर बाद अंदर फंसे पांचों मजदूरों को बाहर निकाला। शनिवार सुबह 10:30 बजे अंदर घुसे मजदूरों को घंटे भर के अभियान के बाद दमकल विभाग के कर्मियों ने बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। शुरुआती जांच में टैंक के भीतर जहरीली गैस के कारण कर्मचारियों की मौत की बात सामने आई है। पुलिस ने तीन कर्मचारियों को फोर्टिस अस्पताल, एक को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और एक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया जहां कुछ देर के बाद डॉक्टरों ने चार कर्मचारियों को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक की हालत गंभीर है। मरने वालों की पहचान छतरपुर की आंबेडकर कालोनी में रहने वाले स्वर्ण सिंह (45), दीपू (28), अनिल (23) और बलविंदर उर्फ बिल्लू (32) के रूप में हुई है। घायल जसपाल भी इसी कालोनी का है। मरने वालों में एक ही परिवार के दो सदस्य हैं। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस जांच में पता चला है कि घिटोरनी की सौ फुटा रोड के पास जिस मकान में यह हादसा हुआ, उसे चार-पांच साल से आधा बनाकर छोड़ दिया गया था। मकान इस समय खाली था और मालिक जेके मेहता इसकी मरम्मत कर किराए पर देने की योजना बना रहा था। इस इलाके में शैक्षिक संस्थान खुलने के कारण ज्यादातर लोग अपने फ्लैट छात्र-छात्राओं को किराए पर देते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि देश की राजधानी होने के बाद भी यहां इस तरह के हादसे रोकने के कोई सटीक उपाय नहीं किए जा रहे, जिससे आए दिन घटनाएं सामने आती रहती हैं। इस इलाके में पानी की दिक्कत होने के कारण अमूमन हर घर में पानी जमा करने के लिए ऐसे टैंक बनाए जाते हैं। कुछ लोग इसी पानी को पीने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। सफाई मजदूरों को कभी भी सरकार की ओर से प्रशिक्षण नहीं दिया जाता और वे पैसे कमाने के चक्कर में बिना कुछ सोचे-समझे टैंक में घुस जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।

 

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