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पुण्य तिथि पर भुलाए गए शास्त्री जी! सरकार से कोई नहीं पहुंचा, कांग्रेस से मनमोहन सिंह ने लगाई समाधि पर हाजिरी

विजय घाट पर पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार की ओर से करवाया जाता है।
ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद 11 जनवरी, 1966 को लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था।

हिन्दुस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्थतिथि ठंडे में गुजर गई। जनवरी की सर्दी में कई नेताओं ने ट्विटर पर ही उन्हें श्रद्धांजलि देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ली। सत्तापक्ष और विपक्ष का कोई बड़ा नेता दिल्ली के विजय घाट पर स्थित शास्त्री मेमोरियल पर उन्हें श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचा। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें याद किया उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने वह खुद विजय घाट पहुंचे। कांग्रेस के पूर्व सचिव प्रवीण दावर ने भी विजय घाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। बीजेपी की ओर से कोई नेता विजय घाट पर नहीं पहुंचा था। विजय घाट पर पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार की ओर से करवाया जाता है। इस बार दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया वहां मौजूद थे। लेकिन इस बार कार्यक्रम में भजन मंडली का ना होना कई लोगों को आश्चर्यचकित कर गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ट्वीट कर भारत के दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी 52वें पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें उनके साहसी नेतृत्व के लिए हमेशा याद किया जाएगा। मोदी ने ट्वीट किया, “हम शास्त्री जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी त्रुटिहीन सेवा और साहसी नेतृत्व को आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।” राहुल गांधी ने उन्हें याद करते हुए ट्वीटर पर उनके एक बयान को शेयर किया। राहुल ने लिखा, ‘हमारे सामने मौजूद सबसे महत्वपूर्ण कामों में से सबसे ज्यादा जरूरी हमारे लोगों की एकता और अखडंता को बनाना है, पूर्व प्रधानंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।’

शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 अक्टूबर 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के यहां हुआ था। ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद 11 जनवरी, 1966 को तत्कालीन सोवियत संघ रूस के ताशकंद में कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मौत हो गई थी। वर्ष 1966 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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