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नेपाल के पीछे हटने पर विदेश मंत्रालय ने जताई नाराजगी

नेपाल को छोड़कर बिम्सटेक के छह सदस्य देशों के थल सैनिकों ने सोमवार से पुणे के पास औंध में एक हफ्ते का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू किया।

नेपाल को छोड़कर बिम्सटेक के छह सदस्य देशों के थल सैनिकों ने सोमवार से पुणे के पास औंध में एक हफ्ते का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू किया। इसका उद्देश्य क्षेत्र में आतंकवाद की चुनौती से निपटने में आपसी सहयोग बढ़ाना है। नेपाल ने इस अभ्यास के लिए अपनी फौज भेजने से इनकार कर दिया था। नेपाल के इस कदम पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को नेपाल को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया है कि उसने बिम्सटेक की सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावना का उल्लंघन किया है।

बिम्सटेक संगठन – भारत, बांग्लादेश, म्यामां, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल का क्षेत्रीय संगठन है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी हाल की चीन से लौटने के बाद बिम्सटेक देशों के सैन्य अभ्यास में शामिल नहीं होने का फैसला किया। जबकि, काठमांडो में ही हुई बिम्सटेक बैठक में सैन्य अभ्यास के प्रस्ताव पर सभी देश सहमत हुए थे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सैन्य अभ्यास में नेपाल ने अपने पांच अधिकारियों और 30 जवानों को भेजने के बारे में अवगत कराया था। लेकिन बाद में प्रधानमंत्री के मौखिक आदेश का हवाला देते हुए शामिल न होने के बारे में जानकारी दी।