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गली पुरानी स्वाद पुराना

दिल्ली-6 की दुनिया बेहद दिलचस्प है। इसकी अंतहीन गलियों की बात करें तो यह जायकों की ऐसी दुनिया है, जो स्वाद और रिवायत से एक साथ परिचित कराती हैं।

दिल्ली-6 की बेहद दिलचस्प दुनिया। फाइल फोटो।

आदर्श शर्मा

दिल्ली-6 की दुनिया बेहद दिलचस्प है। इसकी अंतहीन गलियों की बात करें तो यह जायकों की ऐसी दुनिया है, जो स्वाद और रिवायत से एक साथ परिचित कराती हैं। इन गलियों में दशकों से आबाद ऐसे ही जायकेदार ठिकानों में सबसे पहले जिक्र छाछ वाली दुकान की। चौंकिए मत, यह दुकान इसी नाम से पूरे चांदनी चौक में मशहूर है। जैन मंदिर के सामने पीढ़ियों से चल रही इस दुकान पर ब्रेड पर ताजा सफेद मक्खन, उस पर छिड़का हुआ घर का बना मसाला और साथ में बेहद स्वादिष्ट छाछ। इस लाजवाब स्वाद तक पहुंचने में आपको भले थोड़ा वक्त लग जाए पर यहां आने के बाद की खुशी का तो ठिकाना नहीं रहेगा।

इसके बाद रुख करते हैं चरखे वालान चौक की और मिलते हैं बाबू पूरन हलवाई से। इनकी गरमागरम बेड़मी पूरी, आलू की सब्जी और मेथी की चटनी के न जाने कितने दीवाने हैं। आलू की सब्जी में एक अलग ही तरह का गाजर का अचार उसके स्वाद को दोगुना कर देता है। इसके अलावा हलवा नंगोरी की हल्की सी मिठास आपको बार- बार यहां आने का बहाना देने के लिए काफी है। यहीं पास में है जायके का एक और पुराना ठिकाना- श्री गुजरात नमकीन भंडार। यों तो आपने ढोकला बहुत जगह खाया होगा, लेकिन यकीन मानिए कि यहां जैसा ढोकला और बेसन का फाफड़ा आपको शायद ही कहीं मिले। बेसन के फाफड़े के साथ मिलने वाला हरी मिर्च का आचार इसके जायके को एक अलग ही लुत्फ में बदल देता है।

अगर आप विपिन फाटक वाले की दुकान तक नहीं गए तो आपकी दिल्ली-6 की सैर अधूरी रहेगी। यह दुकान ओम कचौरी वाले के नाम से भी जानी जाती है। गली हकीम बका में 80 साल पुराने जायके के इस ठिकाने पर आने के लिए आपको इतवार का दिन चुनना होगा। आलू और दाल की करारी खस्ता कचौरी और एक बिल्कुल अलग स्वाद लिए इनका आलू का झोल (सब्जी) आपकी इतवारी सैर को यादगार बना देगा।

अगर इतवार का दिन आप नहीं निकाल पा रहे तो इसी गली में स्टैंडर्ड स्वीट्स के अद्वितीय आलू छोले और कोफ्ते की सब्जी और शुद्ध देसी घी की पूरियां आपका मन मोह लेंगी। एक दौर में पुरानी दिल्ली के लाला लोगों का नाश्ता इनके बिना पूरा नहीं होता था। वैसे यहां आएं तो मालपुए का स्वाद भी जरूर लें। स्वाद का यह ऐसा अहसास है जो आपको बार-बार यहां खींच लाएगा।

चाट पापड़ी खाने का मन हो तो सीताराम बाजार का रुख करें। श्री बाबूराम गोलगप्पे वाले की आलू कचालू, पापड़ी चाट और अत्यंत स्वादिष्ट गोलगप्पे आपके मुंह और मन को तृप्त कर देंगे। बताशे भरकर एक अनूठी जायकेदार चाट बनाने का इनका हुनर आपको बेहद पसंद आएगा। फ्री में मिलने वाला इनके गोलगप्पों का तीखा तीखा पानी आपको तरोताजा करने के लिए काफी है। लेकिन ध्यान रहे कि मुफ्त में मिलने वाला स्वाद पेट की अग्निपरीक्षा भी ले सकता है तो बेहतर होगा कि पानी एक-दो बार ही पिया जाए।

तीखे और नमकीन के बाद बात मिठास की। इसके लिए धरमपुरा के किनारी बाजार में हजारीलाल खुरचन वाले से बेहतर ठिकाना और क्या हो सकता है। यहां जैसी खुरचन और दूध की खास मिठाइयां शायद ही आपको कहीं और मिलें। शुद्ध देसी घी से बनी यहां की मिठाइयां मानो आपका इम्तेहान लेती हैं कि कौन सी खाएं और कौन सी न खाएं। इस दुकान पर मीठे के शौकीन लोगों का लगा रहने वाला जमावड़ा इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। मिठाई की यह दुकान कम से कम 75 साल पुरानी है।

गली लोहे वाली में स्थित हीरा लाल चाट कार्नर का नाम संभव है कि आपने पहले से भी सुन रखा हो। इस जायकेदार ठिकाने की खास बात है कुलिया चाट के फल और चटपटे मसालों का बेजोड़ मेल। सौ से भी ज्यादा सालों से इस छोटी सी दुकान पर खाने के शौकीन लोगों का तांता लगा रहता है। टिया महल से कुछ ही दूरी पर है दरीबा कलां। यूं तो दरीबा कलां और मीना बाजार ने कई गीतकारों का ध्यान बरसों से अपनी और आकर्षित किया है लेकिन बात जायके की चल रही है तो यहां संजय शर्मा-नितिन शर्मा की कचौरी और भुने दम आलू का स्वाद ही निराला है। दम आलू यूं तो आपने और भी बहुत जगह खाए होंगे लेकिन यहां के भुने हुए दम आलू आपके तीखा खाने की इच्छा की सच्ची अग्निपरीक्षा लेंगे। दो भाइयों द्वारा संचालित इस छोटी और मात्र एक टेबल पर सिमटी हुई जायके की पुश्तैनी विरासत का मजा आपके नाक, कान, मुंह सब खोल देंगे। वैसे यह जायका हर समय नहीं बल्कि रोज शाम आठ बजे से रात दस बजे तक ही मिल सकता है।

पुराने शहर के पुराने लोगों के लिए रात के खाने के बाद कुल्हड़ वाले दूध की दुकानों पर लगने वाली पंचायत तथा देश-समाज और राजनीतिक बातों पर बतकही उनकी आदत में शुमार रहा है। चांदनी महल इलाके में पुश्तैनी दूध के कारोबारी राजेंदर शर्मा की दुकान इस रिवाज से जुड़ा नामी ठिकाना है। यहां जायकेदार कढ़ाई दूध को कुल्हड़ में परोसने की कला देखकर आप भी मुग्ध हो जाएंगे।

कश्मीरी चाय एक नमकीन अहसास

खाने-पीने और घूमने-फिरने के बीच चाय की तलब भी स्वाभाविक है। अगर आपकी शाम चाय के बिना अधूरी है तो चलिए आपको लिए चलते हैं रिज्क कश्मीरी वाजवां, मटिया महल। मीठी, फीकी, हरी, काली, डिप या बिना डिप वाली चाय तो आप रोज पीते होंगे पर यहां जैसी एकदम अनूठी और लाजवाब नमकीन कश्मीरी चाय शायद ही आपने कहीं पी हो। इस चाय का लुत्फ लेने के लिए आपको बेशक तंग गलियों के जाल से गुजरना होगा लेकिन यहां पहुंचकर आप शायद ही निराश हों। लवासा ब्रेड के साथ परोसी गई कश्मीरी नमकीन चाय और जामा मस्जिद से उठती शाम की अजान यहां एक अलग ही समां बांधती है।

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